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घर के दरवाजों पर पहुंच रहे मगरमच्छ, खौफ में लोग

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crocodile - फोटो : amar ujala
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एटा। जिले में मगरमच्छों को लेकर खौफ बढ़ता जा रहा है। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में भी मगरमच्छों की दहशत नजर आने लगी है। नहरों के पास बने गांवों में मगरमच्छ का आना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। वहीं मगरमच्छों को पकड़ने के लिए प्रशासन और वन विभाग उदासीन नजर आ रहा है।
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नहर नदियों में रहने वाले मगरमच्छ अब घरों के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहर में मगरमच्छ दिखने के मामले कई बार सामने आ चुके हैं, लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते जंगली जानवरों को पकड़ा नहीं जाता। आलम यह है कि सैनिक पड़ाव क्षेत्र में मगरमच्छों की दहशत लोगों के लिए परेशानी बन रही है।

पहले निकल चुके हैं मगरमच्छ
17 मार्च 2017- सैनिक पड़ाव के पीछे बने तालाब में मगरमच्छ देखा गया। यहां लोगों ने मगरमच्छ को पकड़ने की वन विभाग से गुहार लगाई। क्षेत्र में एक सप्ताह तक दहशत रही, लेकिन मगरमच्छ को पकड़ा नहीं जा सका।
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29 नवंबर 2017- गोपालपुर गांव में मगरमच्छ देखा गया। मगरमच्छ ने भैंस को घायल किया। गोताखोरों ने पकड़कर मगरमच्छ को नहर में छोड़ा।
12 दिसंबर 2017- जावड़ा गांव में नहर के पास से मगरमच्छ को पकड़ा गया। जिसे नहर में छोड़ दिया गया।

लखनऊ की टीम कर चुकी है निरीक्षण
मार्च में सैनिक पड़ाव के पास मगरमच्छ निकलने के बाद लखनऊ से आई टीम ने तालाब के पास निरीक्षण किया था। वन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि वह मगरमच्छ को पकड़ नहीं सकते। टीम ने निरीक्षण के दौरान रिपोर्ट शासन को भेजी थी, मगर कोई अनुमति नहीं मिल सकी।

इस वजह से नहीं पकड़ा जा सका था मगरमच्छ
लखनऊ मुख्यालय से सैनिक पड़ाव के तालाब में घूम रहा मगरमच्छ पकड़ने की अनुमति मांगी गई थी, तो अफसरों ने पूछा है कि मगरमच्छ क्यों पकड़ना चाहते हैं। विभाग को अब बताना है कि वन्यजीव वहां रहने वाले लोगों के लिए जानलेवा है या फिर मगरमच्छ के लिए वहां रहने वाले लोग खतरा हैं।

ऐसे आते हैं मगरमच्छ
डीएफओ अखिलेश कश्यप कहते हैं कि अधिक बारिश एवं बाढ़ के चलते निकटवर्ती नहर एवं नदियों से पानी के साथ बहकर छोटे तालाब एवं नालों में मगरमच्छ के बच्चे एवं अंडे आ जाते हैं। जो पर्याप्त पानी मिलने पर पोषित होकर बड़े हो जाते हैं। सूचना पर वन विभाग इन्हें रिहायशी इलाकों से हटा देता है।
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