एटा। जिले में गृह परीक्षाएं मखौल बनकर रह गई हैं। वहीं अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं का तो और भी बुरा हाल है। छात्र ही नहीं संस्थाएं भी इसके लिए गंभीर नहीं हैं। अव्यवस्थाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के सैकड़ों स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं ही नहीं होतीं। यहां वार्षिक परीक्षाओं पर ही रिजल्ट की खानापूरी की जाती है।
संस्थाओं की मनमानी कहें या विभागीय उदासीनता। जिले में शैक्षिक पंचांग का अनुपालन नहीं हो रहा। यूपी बोर्ड संस्थाओं में गृह परीक्षाओं का क्रेज घटता जा रहा है। वहीं अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं तो दूर दर्जनों स्कूलों में वार्षिक गृह परीक्षाएं भी नहीं होतीं। मनमाना शुल्क वसूलने के बाद भी सैकड़ों संस्थाएं परीक्षाएं नहीं करातीं।
आलम यह है कि शैक्षिक पंचंाग में अक्तूबर के अंत में प्रस्तावित अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं सैकड़ों विद्यालयों में अभी तक शुरू भी नहीं हुई हैं। कुछ छात्र-छात्राओं ने बताया कि उनके यहां तो गृह परीक्षाएं भी नहीं होतीं। स्कूल में प्रवेश लेते समय ही पास होने की गारंटी मिल जाती है।
परीक्षा का मतलब बोर्ड परीक्षा
इन संस्थाओं में बोर्ड परीक्षाओं को ही परीक्षा समझा जाता है। परीक्षार्थी, अभिभावकों में भी बोर्ड परीक्षा की ही चिंता दिखती है। गृह परीक्षाओं को लेकर छात्र-छात्राओं में चिंता तो दूर गंभीरता भी नहीं दिखती।
माध्यमिक विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षाएं अनिवार्य हैं। अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं सभी कक्षाओं एवं कक्षा 10 और 12 को छोड़कर शेष की वार्षिक गृह परीक्षाएं होती हैं। वार्षिक परीक्षा परिणामों का सत्यापन भी किया जाता है। अनुपालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। औचक निरीक्षणों में इसका सत्यापन किया जा रहा है।
-श्याम प्रकाश यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक, एटा