एटा। गर्भवती महिला को डिलीवरी के दौरान संक्रमित खून चढ़ाने और एचआईवी पॉजिटिव होने के मामले की जांच में लीपापोती की जा रही है। अब तक स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से नर्सिंग होम चला रही संचालिका के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। साथ ही मामले में खून माफिया का नाम सामने के आने के बाद भी अधिकारी चुप बैठे हैं। जांच को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी को देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है।
दरअसल, पिछले महीने जैथरा निवासी एक महिला संक्रमित खून चढ़ाए जाने से एचआईवी पॉजिटिव हो गई थी। मामला जिला अस्पताल के सुरक्षा क्लीनिक में पहुंचा, तो विभाग में हड़कंप मच गया। पीड़ित दंपति ने कार्रवाई की गुहार लगाई, तो जांच एसीएमओ डा. एसएस पांडेय को सौंपी गई। इसके बाद डा. पांडेय के छुट्टी पर चले जाने से जांच को डिप्टी सीएमओ डा. पीके शर्मा को स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
सूत्र बताते हैं कि पीड़ित दंपति ने संक्रमित खून चढ़ाने वाली अवैध नर्सिंग होम संचालिका के खिलाफ लिखित बयान दे दिए हैं। बताया जाता है कि एक यूनिट खून शिकोहाबाद रोड स्थित हाजीपुरा में नर्सिंग होम पर चढ़ाया गया था। इसके साथ ही एक यूनिट खून एक एंबुलेंस में लगाकर गर्भवती को आगरा रेफर किया गया था। एंबुलेंस चालक के बारे में भी विभाग को जानकारी हो गई है। साथ ही विभाग को नर्सिंग होम को खून उपलब्ध कराने वाले माफिया का नाम भी पता चल चुका है, लेकिन विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। जांच अधिकारी डा. पीके शर्मा कहते हैं कि जांच अभी चल रही है। मामले में जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। डीएम से मिलकर मजिस्ट्रियल जांच का अनुरोध करेंगे।
विभाग के चक्कर काट रहा माफिया
सूत्र बताते हैं कि खून माफिया मामले को दबाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहा है। कई अधिकारियों से बात भी हो चुकी है। इसके साथ ही विभाग के कर्मचारियों पर चुप्पी साधने के लिए दबाब बनाया जा रहा है।