कासगंज। शुक्रवार को शिक्षक की हत्या और डकैती के बाद से मृतक की पत्नी और बच्चे अभी भी दहशत में हैं। उस खौफनाक मंजर को याद कर कलेजा कांपने लगता है। दहशत इतनी है कि बच्चियों ने अभी तक आंख तक नहीं खोली।
रेनू ने बताया कि सबसे पहले एक आदमी कूदा, जब तक वह अपने आप को संभाल पाती तो और लोग भी कूदकर उसके पास आ गए। बताया कि चारपाई के पास करीब छह लोग खड़े थे। बदमाशों ने पलक झपकते ही आठ माह के बच्चे मयंक को अपने कब्जे में लेकर चाकू की नोंक गले से सटाकर मारने धमकी दी, वैसे ही रेनू थरथरा गई। बदमाशों ने बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया। बच्चा जब रोने लगा तो बदमाशों ने उसे दूध पिलाने को कहा। वह जैसे ही बच्चे के लिए बोतल लेने के लिए कमरे की ओर गई तो बदमाशों ने दोनों बच्चियों को भी कमरे में ढकेल दिया और बाहर से भी कुंडी लगा दी। रेनू को अफसोस था कि कमरे में बंद थी और बदमाशों ने उसके पति के विरोध करने पर हत्या कर दी। जब बदमाशों ने लूटपाट करने के बाद कमरे में कमरा खोला तब उसे पति की हत्या की जानकारी हुई। रेनू ने कहा कि अगर वह बंद न होती तो वह भी पति का बदमाशों से संघर्ष में साथ देती। छह वर्ष मैनू और चार वर्ष की अराधना इतनी डरी हुईं हैं कि वे डर और दहशत में आंखें भी नहीं खोल रहीं है। दिन में दोनों ही बच्चियां आंखें बंद करके पड़ी थीं।
पूरे गांव में घटना को लेकर आक्रोश था तो शोक की लहर भी। घरों में चूल्हे तक नहीं जले। ग्रामीण शिक्षक के घर पर ही बैठे रहे। सायं के समय जब गांव में पोस्टमार्टम के बाद शिक्षक का शव पहुंचा तो लोगों की आंखों से आंसू थमने कानाम नहीं ले रहे थे। लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस और प्रशासन भी सतर्क रहा। गांव में अतिरिक्त पुलिस की तैनाती की गई।