एटा। निशाने से ज्यादा पक्षियों के शिकार में प्रयुक्त हो रही एअर गन खरीदने के लिए भी अब लाइसेंस लेना होगा। अधिकृत शस्त्र दुकानों पर नियमानुसार ही इनकी बिक्री होगी। नए निर्देश के बाद शस्त्र कार्यालय को एअर गन का कोई आवेदन नहीं मिला है।
बंदर व अन्य पशु-पक्षियों को डराना भी महंगा हो गया है।
इनसे सुरक्षा के लिए एअर गन लेने के लिए प्रशासन से लाइसेंस लेना होगा। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही एअर गन (हवाई शस्त्र) खरीद सकेंगे। नई शस्त्र नियमावली में आए निर्देशों के बाद इसकी बिक्री भी थम गई है।
जिला शस्त्र कार्यालय के अनुसार अभी तक एअर गन के लिए कोई भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। बताते चलें कि एअर गन से जहां लोग बंदरों व अन्य पशु पक्षिओं को डराने में करते हैं। वहीं कुछ लोग इसका दुरुपयोग कबूतर, तीतर, सोना पतारी आदि पक्षियों के शिकार में करते थे। जिले में हजारों एअर गन पहले से ही हैं। सर्वाधिक एअर गन बंदर बहुल कसबों अलीगंज, अवागढ़, जैथरा, जलेसर नगरों में हैं। वहीं जिले में 32 हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस धारक हैं।