कासगंज। जिले के 184 गांव और 20 बस्तियां ऐसी हैं, जिनमें मलेरिया एवं डेंंगू का खतरा सबसे अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवोंको उच्च जोखिम की श्रेणी में रखा है। इन चिन्हित स्थानों में मच्छर जनित बीमारियां फैलने की आशंका सर्वाधिक है।मौसम में आए बदलाव के साथ मच्छर भी बढ़ने लगे हैं। नतीजा आम जनजीवन पर इस असर देखा जा रहा है। लोग मच्छरों से परेशान हो रहे हैं। वहीं, बुखार पीड़ित मरीजों में मलेरिया व डेंगू के लक्षण मिलने से उनकी चिंता बढ़ गई है। जिले के 184 गांव ऐसे हैं जिनमें डेंगू या मलेरिया के मरीज लगातार तीन साल से निकल रहे हैं। कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 46 गांव सोरों क्षेत्र के हैं। इस श्रेणी में कासगंज के 33, गंजडुंडवारा के 30, सहावर क 26 गांव, सिढ़पुरा के 18, पटियाली के 17, अमांपुर के 14 गांव शामिल हैं। मलेरिया विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। साथ ही पंचायतीराज विभाग को इन गांवों विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ डॉ. राजीव अग्रवाल के अनुसार संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए अभियान शुरू हो गया है। जिन गांव या बस्तियों में तीन साल से मामले सामने आ रहे हैं उन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इस साल बीमारियों के प्रकोप को रोका जा सके।
शहर की ये बस्तियां हैं संवेदनशीन: मोहल्ला जय जयराम, रामबली कॉलोनी, भूतेश्वर कॉलोनी, गंगेश्वर कॉलोनी, दुर्गा कॉलोनी, अशोक नगर, ज्वालापुरी, रेलवे कॉलोनी, आवास विकास, माधौपुरी, ऑफिसर कॉलोनी, चित्रगुप्त कॉलोनी, मोहल्ला नवाब, मोहल्ला नाथूराम, सूर्य नगर, सिटी मोहल्ला, श्रीगणेश कॉेलोनी, बडडू नगर, हुल्का मोहल्ला बस्तियां स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील सूची में शामिल हैं।
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