अब किसान हाइब्रिड धान भी बेच सकेंगे खरीद केंद्र पर
- शासन ने किसानों को राहत देने को रिकवरी का तीन प्रतिशत घटाया
अमर उजाला ब्यूरो
कासगंज। अब किसान अपना हाइब्रिड धान भी सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे। शासन ने किसानों को राहत देने के लिए तीन प्रतिशत रिकवरी घटा दी है। इस अंतर की भरपाई सरकार करेगी। सरकार मिल मालिकों को इस अंतर का भुगतान करेगी।
जनपद में 14719 हेक्टेयर मे धान की फसल बोई गई हैं। इनमें से बड़ी संख्या में किसानाें ने हाइब्रिड धान की पैदावार की है। यूं तो धान में 67 प्रतिशत चावल की रिकवरी होती है, लेकिन हाइब्रिड धान में रिकवरी नहीं आती। रिकवरी कम होने पर धान को सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान सरकारी समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं उठा पाते है। हालांकि राज्य सरकार ने ऐसे किसानों को राहत दी है। सरकार ने रिकवरी का मानक 67 प्रतिशत से घटाकर 64 प्रतिशत कर दिया है। इससे अब किसान अपना हाइब्रिड धान भी सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच सकेंगे लेकिन धान की कुटाई के बाद मिलर्स को भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में 67 प्रतिशत चावल जमा करना होगा। इस अंतर की भरपाई शासन स्तर से की जाएगी। शासन मिलर्स को 88.15 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करेगा।
शासन ने हाइब्रिड धान की रिकवरी तीन प्रतिशत घटा दी है। शासन के निर्णय के बाद अब किसान आसानी से अपना हाइब्रिड धान भी आसानी से सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे। इस संबंध सभी केंद्र प्रभारियों को दिशा निर्देश जारी कर दिए है।
-विजय कुमार शुक्ला खाद्य एवं विपणन अधिकारी