मथुरा। आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान पर अमर उजाला द्वारा छेड़ी गई मुहिम ने एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले लिया है। शासन और प्रशासन की नींद तोड़ने के लिए किसानों ने 27 दिसंबर को कलक्ट्रेट घेरने का एलान किया है। गोकुल बैराज से कलक्ट्रेट तक पद यात्रा की जाएगी। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान शामिल होंगे। भाकियू ने मीटिंग करके इसकी रणनीति तैयार की है।
जिले भर में आवारा पशु किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। हजारों बीघा फसल को चौपट कर देते हैं। लेकिन प्रशासन और शासन ने इन पशुओं को पकड़ने की कोई प्लानिंग नहीं बनाई है। अभी तो यह भी तय नहीं हो सका है कि कौन विभाग पशुओं को पकड़ेगा। मजबूर किसान रातों को जागकर फसलों की देखभाल कर रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन ने 27 दिसंबर को कलक्ट्रेट घेरने का एलान किया है। किसान भवन में हुई मीटिंग में भाकियू के जिलाध्यक्ष राजकुमार तोमर ने कहा कि हर साल फसलों का बड़ा रकबा आवारा पशु चौपट कर देते हैं। गेहूं, सरसों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। लेकिन प्रशासन और शासन किसानों की इस बड़ी समस्या का कोई समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
अब जब तक सरकार कोई हल नहीं निकालती आंदोलन जारी रहेगा। जिलाध्यक्ष राजकुमार तोमर ने कहा कि 27 को गोकुल बैराज से कलक्ट्रेट तक किसान पद यात्रा करेंगे। उसके बाद कलक्ट्रेट को घेरा जाएगा। इस दौरान चौधरी सिकंदर सिंह, चेतन नौहवार, देवेंद्र रघुवंशी, जयपाल सिंह, रोहताश, सोनू प्रधान, नीटू चौधरी के साथ तमाम लोग रहे।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी किसानों में भर रहा गुस्सा
मथुरा। आवारा पशुओं द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचा दिया है। किसानों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि सरकार पर मिलकर दबाव बनाते तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लिया जाता। मगर किसी ने किसानों की समस्या को समझा ही नहीं। नौहझील निवासी करतार सिंह ने बताया कि कभी माननीयों ने ध्यान नहीं दिया। फरह निवासी जगवीर सिंह का कहना है कि अगर विधायक या मंत्री सरकार से कहें तो कभी की यह समस्या दूर हो सकती थी।