एटा। किसानों को तकनीकी सिंचाई प्रणाली के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी जिला उद्यान विभाग को दी गई है। इस तकनीक से किसान पानी की बरबादी को भी रोक सकेंगे और फसल की उपज भी बढ़ेगी। जिले में छह सौ हेक्टेयर से अधिक का लक्ष्य दिया गया है।
जिला उद्यान विभाग को सरकार की ओर से तकनीकी सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करने की मंशा है। नई तकनीक में दो प्रकार की सिंचाई शामिल की गई, एक ड्रिप सिंचाई व्यवस्था है तो दूसरा स्प्रिंकलर। दोनों ही व्यवस्थाएं किसानों के लिए लाभकारी हैं। यह तकनीक जिले के कुछ किसान पहले से अपना भी रहे हैं और लाभ पाकर अन्य किसानों को प्रेरित कर रहे हैं।
ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई संसाधनों को जुटाने के लिए सरकार की ओर से 90 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। किसान को अनुदान राशि सरकार सीधे बैंक खाते में भेजेगी। ड्रिप योजना में 370 हेक्टेयर व स्प्रिंकलर योजना में 270 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई कराने का लक्ष्य शासन की ओर से जिले को मिला है।
‘ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई योजना किसानों के लिए अच्छी तकनीक है। सरकार की ओर से 90 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। जिले में दोनों सिंचाई योजना के लिए 640 हेक्टेयर जमीन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है।’
नलिन सुंदरम भट्ट, जिला उद्यान अधिकारी