मथुरा। स्मार्ट सिटी का ख्वाब देख रहे थे। सुंदरीकरण के नाम पर करोड़ों खर्च कर दिए। सफाई के लिए भी खूब बजट आया। सफाई के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कभी मंत्री ने झाड़ू पकड़ी तो कभी सांसद ने। भाजपा के विधायकों से लेकर नेताओं तक ने मोहल्ले-मोहल्ले जाकर संदेश दिया। लेकिन रिजल्ट आपके सामने है। देश के जो साफ 100 शहरों की सूची जारी हुई है उसमें मथुरा कहीं नहीं है। प्रदेश में भी कोई नंबर नहीं मिला है।
मथुरा में हर साल पचास लाख से भी ज्यादा कृष्ण भक्त मथुरा आते हैं। हजारों विदेशी पहुंचते हैं। मथुरा में पसरी गंदगी शहर का नाम दूर दूर तक खराब करती है। हालांकि मथुरा को साफ सुथरा बनाने के लिए तमाम प्रयास हुए लेकिन अधिकांश कागजी। भाजपा के धुरंधरों ने भी केवल कैमरे की फ्लैश चमकने तक झाड़ू पकड़ी और फिर एक तरफ रख दी। इन लोगों का यह प्रयास कोई असर दिखा नहीं सका। नगर निगम द्वारा प्रचार प्रसार के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया।
जगह-जगह कूड़ेदान रखवाए गए लेकिन कूड़ा फिर भी सड़कों पर बिखरा। बाजारों में तो स्थिति और भी खराब रही। वृंदावन की स्थिति तो और भी खराब है। इस धर्मनगरी में भी जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं।
लाखों को दिलाई गई शपथ
देश के स्वच्छता सर्वेक्षण में लाने के लिए नगर निगम द्वारा कितनी गंभीरता से काम किया गया इसका इसी से पता चलता है कि उसने लाखों छात्र-छात्राओं के फोटो कराकर स्वच्छता की शपथ दिलाई लेकिन वास्तव में स्वच्छता अभियान को परवान चढ़ाने में वह फिसड्डी साबित हुआ।
स्वच्छता एप, पोर्टल हो गया बंद
निगम के अधिकारियों ने बड़े जोर शोर से स्वच्छता एप और पोर्टल की शुरूआत की। इसका उपयोग करना तो दूर अब अधिकारी इनको भूल ही चुके हैं। उस एप के माध्यम से उनके द्वारा शहर को स्वच्छता सूची में लाने के लिए कोई काम नहीं किया गया।