भगवान गोदारंगमन्नार दिव्य रथ पर विराजमान।
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वृंदावन (मथुरा)। उत्तर भारत के प्रमुख रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव में सोमवार को भगवान गोदारंगमन्नार ने दिव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। भगवान गोदारंगमन्नार के दिव्य रथ को खींचकर श्रद्धालु धन्य हुए।
इस दौरान सुबह रंगनाथ मंदिर के पुरोहितों के निर्देशन में वैदिक रीति-रिवाजों और विधानपूर्वक दिव्य रथ का छत्र कलश पूजन किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को दिव्य रथ में विराजमान कराया गया। भगवान गोदारंगमन्नार के दिव्य रथ को खींचने के लिए असंख्य श्रद्धालू मंदिर के पश्चिम गेट पर एकत्रित हो गए। श्रद्घालुओं ने रस्से को पकड़कर रथ को खींचना शुरू किया। वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा वेदमय स्तुतियों के साथ तुरई, ढोल, मृदंग सहित परंपरागत वाद्यों के मध्य रथ दोपहर लगभग 12 बजे रंगजी के बगीचा पहुंचा।
बगीचे में भगवान गोदारंगमन्नार के श्रीविगह को विश्राम कराया गया। इसके बाद दोपहर 1 बजे रथ पुन: मंदिर के पश्चिम द्वार की ओर चल दिया। जगह-जगह भगवान गोदारंगमन्नार को मिश्री का भोग लगाया गया। विभिन्न प्रदेशों और जनपदों से आईं महिला श्रद्धालु शोभायात्रा में नृत्य करतीं चल रही थीं। रथ के मंदिर के पश्चिम द्वार पर पहुंचने पर श्रद्धालुओं के द्वारा कपूर की आरती उतारी गई। भगवान गोदारंगमन्नार के दिव्य रथ के मंदिर परिसर में लौटने पर ठाकुरजी को वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य मंदिर परिसर में स्थित बगीचे में ले जाया गया। जहां ठाकुरजी के समक्ष रंगीन फव्वारे चलाए गए। रथ मेले में लगे ऊंचे झूले, चरख एवं स्टाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। नन्हे-मुन्ने बच्चे भी मेले का जमकर आनंद लेते दिखाई दिए।