मथुरा। ठप ढोल की ताल पर थिरकन, बिखरते टेसू के रंग की महक और हुरियारिनों के प्रेम पगे कोड़े । कृष्ण के बड़े भाई बलराम के सामने हुरंगा का ऐसा रंग मंदिर प्रांगण में बरसा कि समस्त देवी-देवता हुरंगा के इस रंग में सराबोर हो गए।
बलदाऊ के आरती के साथ ही सेवायतों के परिवार मंदिर प्रांगण में जम गए। संगीत के सुर लहरियां पर कदम थिरकने लगे। हुरियारिनों के साथ रसिसा लयबद्ध होकर नाचने लगे। मंदिर प्रांगण के ऊपर चारों और बनी बालकनी से फूलों की बरसात होने लगी। देखते देखते हुरंगा का जादूई रंग सबके तन मन पर चढ़ने लगा। एक साथ टेसू के रंगों की बौछार बढ़ गई और हुरियारिनों को प्रेम का नशा चढ़ने लगा। उनके द्वारा होली खेल रहे हुरियारों पर उनके ही कपड़े फाड़ कर बनाए गए कोड़ों की बौछार करने लगीं।
चारों और अद्भुत नजारा दिखाई देने लगा। इसके साथ ही दाऊ ने रंग में बोर दई, खेलो होरी में हुरंगा, सखी री होरी नांय हुरंगा ऐ, दाऊ खैलें संग रेवती बाजत ढप भौचंगा है, आ जइयो श्याम बलदेव, तेरे गुलचा चार लगाय दूंगी, होरी कौ मजा चखाय दूंगी, मेरौ दाऊ बड़ौ मतवालौ, होरी में खेले हुरंगा भजनों के साथ हुरंगा के साक्षी बने भक्त भी थिरकने लगे। ब्रज के सभी प्रमुख संतों ने भी हुरंगा का भरपूर आनंद लिया। हुरंगा में कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज, बरसाना के प्रमुख संत रमेश बाबा, राजेंद्र दासजी महाराज के अलावा वृंदावन बरसाना गोवर्धन के प्रमुख संत मौजूद थे। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, बलदेव पूरन प्रकाश मौजूद रहे।