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कोयले की आवक पर ‘नो एंट्री’

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आगरा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में कोयले के प्रयोग को पूर्णत: प्रतिबंधित करने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पेठा इकाइयों को कोयला भट्ठी बंद करने के लिए कहा है।
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वहीं, मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने शहर में कोयले की आवक ही प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए हैं। टीटीजेड में कृषि अपशिष्ट जलाने पर रोक पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इस संबंध में मंडलायुक्त ने टीटीजेड अंतर्गत आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, एटा और भरतपुर के जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत टीटीजेड में किसी भी प्रकार की प्रदूषणकारी गतिविधि अनुमन्य नहीं है।
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एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के तहत दो एकड़ से कम क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 2500 रुपये प्रति घटना, पांच एकड़ से कम क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर 15 हजार रुपये प्रति घटना अर्थ दंड वसूला जाएगा। मंडलायुक्त ने टीटीजेड में कृषि अपशिष्ट जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया है।

प्रदूषण को नियंत्रित रखने की दृष्टि से यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अतुलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पेठा इकाइयों को कोयले के प्रयोग को बंद करने के लिए कहा है। कहा है कि कोयला भट्ठी प्रयोग करते पकड़े जाने पर एक लाख रुपये जुर्माना और पांच साल की कैद हो सकती है।

इधर, मंडलायुक्त ने पिछले दिनों हुई टीटीजेड की बैठक में कोयले की आवक ही शहर में प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे। उनका कहना था कि जब कोयला शहर में आएगा ही नहीं तो लोग इसका प्रयोग ही नहीं कर पाएंगे। इसलिए अब कोयले की ‘नो एंट्री’ की तैयारी की जा रही है।
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