मथुरा। मंगलवार को एडीजे अष्टम की अदालत ने किशोर की हत्या में पिता-पुत्र को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दोनों पर एक- एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं नाबालिग बेटे का केस जुवेनाइल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। इस घटना का मुख्य मुजरिम को हत्या के एक मामले में पहले भी उम्रकैद की सजा हो चुकी है।
यह वारदात कोसीकलां थाना क्षेत्र के गांव खरोंठ में 10 दिसंबर 2008 को हुई थी। कोसीकलां थाने में नवल सिंह ने दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा था कि उसका 12 वर्षीय बेटा धर्म उर्फ सोनू अचानक घर से लापता हो गया था। गांव के वीरबल और गिरिराज ने बताया कि उन्होंने सोनू को गांव के रामकिशन के बेटे बहादुर के साथ देखा था। शक होने पर गांव में खोजबीन शुरू हुई तो गांव के बाहर ग्रामीण रामकिशन की बुर्जी के पास सोनू के चप्पल बरामद हो गए। जब बुर्जी के भीतर देखा तो भूसे के बीच में सोनू का शव मिल गया। लोगों ने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गला रेता गया था।
पुलिस ने रामकिशन और उसके बेटे जगवीर और नाबालिग पुत्र को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग को किशोर संप्रेक्षण गृह भेजा गया जबकि रामकिशन और जगवीर को जेल भेज दिया गया। हत्या की वजह उधार का 80 हजार रुपया बताया गया है। रामकिशन ने नवल सिंह से 80 हजार रुपया उधार लिया था। वापस मांगने पर रामकिशन रंजिश मानने लगा था। इस मामले की सुनवाई एडीजे अष्टम सुदामा प्रसाद की अदालत में चल रही थी।
सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी मानते हुए रामकिशन और उसके बेटे जगवीर को आजीवन कारावास की सजा और एक-एक लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि नाबालिग बेटे का मुकदमा जुवेनाइल कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया है। एडीजीसी वीरेंद्र लवानिया ने बताया कि रामकिशन को एक अन्य हत्या के मामले में पहले भी आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। घटना के दौरान वह जमानत पर चल रहा था।