नगर निकायों के अध्यक्ष पद के आरक्षण की सूची आते ही जिल में प्रमुख पार्टियों के साथ ही चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों तक का गणित गड़बड़ा गया है।
जहां अब तक दावेदारी करने में जुटे लोगों व उनके समर्थकों के चेहरों पर मायूसी छा गई है। वहीं पार्टियां भी अब नए सिरे से नगर पालिका और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के दावेदारों की तलाश में नए सिरे से जुट गई हैं। आरक्षण का सबसे अधिक असर नगर पालिका मैनपुरी पर पड़ा है।
गुरुवार को जब निकायों के अध्यक्ष पद का आरक्षण जारी हुई तो सभी की आशाओं पर तुषारापात हो गया। कारण मैनपुरी नगर पालिका का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया था।
इसके चलते निकाय चुनावों में अध्यक्ष पद की टिकट पाने के लिए विभिन्न पार्टियों में दावेदारी कर रहे दो दर्जन से अधिक दावेदारों की आशाओं पर पानी फिर गया। वहीं अब तक प्रत्याशी घोषित करने के लिए विभिन्न पार्टियों ने जो तैयारी की थी वह भी धरी की धरी रह गई।
जहां सामान्य और पिछड़ा वर्ग के दावेदारों और उनके समर्थकों के चेहरे लटक गए हैं। वहीं पार्टियों को भी आरक्षण जारी होने के बाद नए सिरे से चुनाव के लिए रणनीति बनानी पड़ेगी।
नगर पालिका की सीट सामान्य और पिछड़ा वर्ग की होने की आस में कई दावेदारों ने तो शहर भर में प्रचार तक शुरू कर दिया था। इसके चलते होर्डिंग, फ्लैक्स और अन्य प्रचार सामग्री से पाट दिया था। इसमें उन्होेंने लाखों रुपये तक खर्च कर दिए थे। लेकिन नगर पालिका का अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद उनकी आशाओं पर पानी फिर गया। वहीं लाखों रुपये भी बेकार हो गए।
इस बार नगर पंचायतों के अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाने से कई महिलाएं रातों रात नेता बनकर सामने आ गईं। नगर पंचायत अध्यक्ष की दावेदार इन महिलाओं में ज्यादातर उन्हीं लोगों की पत्नी हैं जो पहले से चुनाव के लिए जमीन तैयार करने में जुटे पड़े थे।
इन नेताओं ने पत्नी के नाम को अध्यक्ष पद के दावेदार के तौर व्हाट्स एप, फेसबुक पर चलाना भी शुरू कर दिया है। इनके अलावा कुछ अन्य महिलाएं भी संभावित प्रत्याशी बनकर सामने आ रही हैं। इनमें से कुछ ने अपने फोटो भी अपलोड कर समर्थन मांगना शुरू कर दिया है।