एटा। प्रदेश सरकार कुपोषण को दूर करने के लिए शबरी, पोषाहार जैसी योजनाएं चला रही है, लेकिन कुपोषण बच्चों का पीछा नहीं छोड़ रहा। कुपोषण से निपटने के दावों की जिले में हवा निकल रही है। आलम यह है कि जिले में चार हजार बच्चे अतिकुपोषित और 25 हजार कुपोषित हैं। यही नहीं माताओं पर कुपोषण का खतरा मंडरा रहा है। जिले मेें 5963 महिलाएं एनीमिक चिंहित हुई हैं। आंकड़ों से साफ जाहिर है कि जिले में सरकारी कवायदों की हवा निकल रही है।
जिले में 1803 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जहां बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर बच्चों को पोषाहार बांटा जाता है। केंद्राें पर हर सप्ताह पोषाहार दिवस, ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस आयोजित होते हैं, लेकिन जिले मेें कुपोषण का सच कुछ अलग है। अगस्त महीने की रिपोर्ट बताती है कि जिले में 4,054 बच्चे अतिकुपोषित और 25,537 बच्चे कुपोषित श्रेणी में हैं। विभाग की मानें तो जिले में अतिकुपोषित श्रेणी में जुलाई माह में 5,011 बच्चे और कुपोषित श्रेणी में 26,889 बच्चे थे। एक माह में करीब 3472 बच्चों को पोषित किया गया। 1,163 बच्चे नए कुपोषित मिले। जिले में गर्भवती महिलाओं के पोषण का हाल बेहद खराब है। अगस्त में 18,986 गर्भवतियों के हीमोग्लोबिन की जांच हुई। 5,963 गर्भवती एनीमिक मिलीं। विभाग की रिपोर्ट कहती है कि जांच के बाद 3750 एनीमिक महिलाओं के उपचार की व्यवस्था की गई है। आंकड़े कहते हैं कि जिले में कुपोषण से लड़ने के लिए सरकारी मशीनरी को मशक्कत करने की जरूरत है।
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एनआरसी का हाल खराब
कुपोषण से निपटने के लिए जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र का हाल खराब है। पोषण केंद्र में बीते दो महीने पहले दो मासूमों की मौत चुकी है। केंद्र में बेड की संख्या कम है। पोषण केंद्र को लेकर कई बार जिला स्तरीय अधिकारी निर्देश दे चुके हैं, लेकिन हाल बेहाल है।
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अवागढ़, निधौलीकलां का हाल बेहाल
जिले में कुपोषण की स्थिति सबसे ज्यादा अवागढ़ और निधौलीकलां ब्लॉक में खराब है। अवागढ़ में 674 बच्चे और निधौलीकलां में 665 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
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यह है हाल
ब्लॉक अति कुपोषित कुपोषित
मारहरा 221 1602
अवागढ़ 674 2703
जलेसर 484 1551
निधौलीकलां 665 3605
सकीट 305 2287
शीतलपुर 450 5088
जैथरा 515 3888
अलीगंज 653 3511
एटा अर्बन 87 1302
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गर्भवती महिलाएं- 14126
हीमोग्लोबिन की जांच- 18986
एनीमिक- 5963
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इनका कहना है
कुपोषण से जुझने के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। बच्चों और गर्भवतियों के पोषण के लिए काम किया जा रहा है। जल्द ही कुपोषण की स्थिति में सुधार आएगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ