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पूर्र्व नगर आयुक्त पर जांच की तलवार

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आगरा। पूर्व अपर नगर आयुक्त राम सिंह गौतम पर जांच की तलवार लटक रही है। उनके खिलाफ संविदा सफाई कर्मियों की भर्ती में भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग और सरकारी भवन में नगर निगम के धन का दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। यह मामला उनकी नगर निगम में तैनाती के समय से चल रहा है। अब नगर निगम जांच के लिए शासन से अनुमति लेने को जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
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यमुना पार की ट्रांस यमुना कालोनी फेस के निवासी महेंद्र कुमार ने 28 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन अपर नगर आयुक्त राम सिंह गौतम के खिलाफ शिकायत की थी। महेंद्र कुमार का आरोप था कि राम सिंह गौतम का तबादला एडीएम सिविल सप्लाई के पद पर हो गया था लेकिन उन्होंने संविदा सफाई कर्मियों के भर्ती से वित्तीय लाभ उठाने के लिए तमाम सिफारिशें कराईं और रिलीव नहीं हुए। उन्होंने नगर निगम के अतिथि गृृह को संविदा सफाई कर्मचारियों के साक्षात्कार के लिए प्रयोग किया। इसकी कोई अनुमति नहीं ली।

अतिथिगृह की से आय रुकी और इससे निगम को वित्तीय नुकसान हुआ। संविदा कर्मियों के साक्षात्कार में ठेकेदार के जरिये नियुक्त कंप्यूटर आपरेटरों को लगाया है। इससे परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई। यही नहीं उन्होंने आवंटित सरकारी आवास में निगम का खर्च कर अपनी सुख सुविधा इंतजाम किए। आरोप है यमुनापार क्षेत्र में ऐसे कई हास्पिटल और व्यवसायिक भवन हैं जिनके कर निर्धारण नियमों को ताक पर रख दिया गया है। उन्होंने अवैध रूप से नीली बत्ती का प्रयोग किया। इस मामले ने तूल पकड़ा तो अब नगर निगम के अधिकारियों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच कराने के लिए शासन से निर्देश प्राप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि राम सिंह गौतम प्रशासनिक अधिकारी हैं लिहाजा जांच से पहले शासन से अनुमति ले ली जाए।
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अभी तक खाली नहीं सरकारी आवास
पूर्र्व नगर आयुक्त राम सिंह गौतम का तबादला अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर हो गया लेकिन उन्होंने अभी तक सरकारी आवास खाली नहीं किया है। नगर निगम के अधिकारी आवास के लिए भटक रहे हैं।

घोटालों का घर बन गया है निगम
नगर निगम घोटालों का घर बन गया है। यहां के तमाम अधिकारी और कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। इनमें पूर्व सहायक नगर आयुक्त कासिम रजा, नायब महोर्रिर सुदेश दीपक और एक संविदा कर्मी की विजिलेंस जांच चल रही है। सीवर में गिरने से बालक की मौत के मामले में भी नगर निगम की जांच जारी है। निगम में कालोनी हस्तांतरण के प्रकरण की जांच जारी है। 40 लाख रुपये के टैक्स की घोटाले की जांच चल रही है।
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