मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है। लेकिन बिजली विभाग ने अभी तक मानसून से निपटने की तैयारी नहीं की है। बिजली की सप्लाई के लिए लगाए गए ट्रांसफार्मर असुरक्षित हैं। ये कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
बिजली विभाग ने विद्युत सप्लाई के लिए जिले में छोटे-बड़े करीब चार हजार ट्रांसफार्मर लगवा रखे हैं। इनमें से काफी संख्या में ट्रांसफार्मर ऐसे भी हैं जो आबादी के बीचों बीच रखे हुए है। विभाग इनके रखरखाव के प्रति गंभीर नजर नहीं आता। नगरीय क्षेत्र में ही कई ऐसे ट्रांसफार्मर हैं जिनके चारों ओर सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
ट्रांसफार्मरों के आगे सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम तक नहीं हैं। इनकी केबलें जमीन को छू रही हैं। बारिश के दिनों में जगह-जगह गंदा पानी जमा हो जाता है। पानी भरने पर ट्रांसफार्मरों की केबलें पानी में डूब जाती हैं। पोल में करंट फैल जाता है।
पूर्व में कई बार हादसे भी हो चुके हैं। इनमें तमाम लोगों की जानें जा चुकी हैं। इसके बाद भी विभाग गंभीर नजर नहीं आता। पूर्व में कई बार हादसे भी हो चुके हैं। बारिश के दिनों में पूर्व में नावल्टी रोड के ट्रांसफार्मर से आधा दर्जन पशुओं की मौत हो गई थी। सूत की मंडी में पोल में करंट आने से एक जानवर मौत के आगोश में समा गया था। इस तरह के तमाम हादसे हो चुके हैं।
बिजली की लाइनें भी हैं असुरक्षित
कासगंज।
बिजली विभाग ने जिले भर में 65 हजार किमी हाईटेंशन लाइन बिछी है। इस लाइन के अधिकांश हिस्से के नीचे गार्डनिंग की व्यवस्था तक नहीं की गई है। इसके अलाव दो लाख किमी एलटी लाइनें भी बिछी हुई हैं। तमाम क्षेत्रों में बिजली की लाइनें भवनों के ऊपर से होकर गुजर रही हैं। तार टूटने पर कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई जानें जा चुकी हैं।
पेड़ भी बनते हैं हादसे के कारण
कासगंज।
बिजली की लाइनें तमाम स्थानों पर पेड़ो के नजदीक से होकर गुजर रही है। बारिश के दिनों में पेड़ों की टहनियां भी टूटकर लाइनों पर गिरती रहती हैं, जिससे हादसे की संभावना बड़ जाती है, लेकिन पेड़ो के पास से होकर गुजर रही लाइनों की सुरक्षा को भी ध्यान नहीं दिया जाता।
बारिश के मौसम को देखते हुए विभाग ने अपनी तैयारियां कर ली है। कई ट्रांसफार्मरों के साथ एमसी लगाई गई है। बिजली घरों की मशीनों पर भी सुरक्षा की व्यवस्था की गई हैं, जिससे फाल्ट होने पर तार टूटने की स्थिति में हादसा न हो सके
हरीश कुमार, एसडीओ