बाह। विश्व मगरमच्छ दिवस पर शुक्रवार को वन विभाग चंबल नदी में मगरमच्छ की हैचिंग की निगरानी में जुटा रहा। दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे मगरमच्छ की संख्या चंबल में एक साल के दौरान 176 बढ़ गई हैं। यहां इनका कुनबा 710 से बढ़ कर 882 हो गया है।
वन विभाग के मुताबिक 1979 में चंबल नदी को घड़ियाल और मगरमच्छ के संरक्षण के लिए चुना गया था। नदी की बालू पर प्राकृतिक प्रजनन के जरिए इनके कुनबे में गुणात्मक वृद्धि हुई है। वन विभाग की वार्षिक गणना रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में 454, 2017 में 562, 2018 में 613, 2019 में 706, 2020 में 710, 2021 में 882 मगरमच्छ चंबल नदी में हो गए हैं। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि चंबल नदी में मगरमच्छ की संख्या बढने के साथ ही मानव मगरमच्छ संघर्ष की घटनाएं बढ़ने का खतरा रहता है। बाह रेंज में नदी किनारे के ग्रामीणों को मगरमच्छ के व्यवहार के प्रति जागरूक कर संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यही वजह है कि बाह रेंज में हमले कम हो रहे हैं। साथ ही मगरमच्छ की आबादी बढ़ रही है।
हैचिंग पीरियड में मगरमच्छ हमलावर हो जाते हैं। अप्रैल में मगरमच्छ चंबल की बालू में अंडे देते हैं। वन विभाग इनकी निगरानी करता है। रेंजर ने बताया कि जून में हैचिंग पीरियड में नदी किनारे जाने वाले लोगों से अपने अंडों को नुकसान पहुंचाने के अंदेशे में मगरमच्छ हमलावर हो जाते है। इस कारण हैचिंग पीरियड के दौरान ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने के लिए अलर्ट किया जाता है।