दिखावे के रह गए क्रय केंद्र, किसानों से नहीं खरीदा जा रहा गेहूं
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एटा। अन्नदाताओं की उपज का बेहतर मूल्य मिल सके, इसके लिए सरकार ने क्रय केंद्रों पर ज्यादा से ज्यादा खरीद कराने के लिए जिम्मेदारों को लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। जिले में ऐसा होता नहीं दिख रहा है किसान गेहूं बिक्री करने के लिए क्रय केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं ओर उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। किसान क्रय केंद्रों पर भटक रहे हैं और उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। क्रय केंद्र प्रभारी मार्का को लेकर बहानेबाजी कर रहे हैं। ऐसे में किसान कहां जाए वह खुद नहीं समझ पा रहा है। इतना ही नहीं किसान जब क्रय केंद्रों पर भाड़े के वाहन से गेहूं लेकर पहुंचता है तो उससे मना कर दिया जाता है। भाड़े का वाहन होने की वजह से सांसें हलक में अटक जाती हैं और वह मजबूरी में मंडी में व्यापारियों के पास लेकर जाता है तो 1600 और 1650 रुपये में खरीद की बात की जाती है। 200 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा किसान को उठाना पड़ रहा है
दस दिन से गेहूं बिक्री करने के लिए परेशान हैं, सरकारी क्रय केन्द्रों पर प्रभारी बहाने बना कर खरीद नहीं कर रहे हैं। ऐसे में किसान अपना गेहूं बिक्री करने के लिए कहां जाए। सतीश कुमार, किसान
गेहूं बिक्री करने के लिए क्रय केंद्र ककरावली, पिलुआ और निधौलीकलां के कई चक्कर काट चुके हैं। लेकिन केंद्र प्रभारी मार्का का तो कभी कोई और बहाना बनाकर टहलाए जा रहे हैं। रामवीर सिंह, किसान
किसानों का गेहूं क्रय केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा है, ऐसी सूचना मेरे पास नहीं है। अगर क्रय केंद्र प्रभारी ऐसा कर रहे हैं तो किसानों से बात करके जांच करूंगी, दोषी पाए जाने पर केंद्र प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
प्रज्ञा शर्मा, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी