कामधेनु डेरियां बंद करने वालों से वसूली जाएगी ब्याज सहित धनराशि
जिले में पांच कामधेनु, 29 मिनी और 41 माइक्रो कामधेनु डेयरी हुई थी संचालित
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। पिछली सरकार में लोगों को श्वेत क्रांति से जोड़ने के लिए कामधेनु योजना की शुरुआत की गई थी। योजना के तहत जिले में तकरीबन 75 कामधेनु डेयरियां खुल गईं। इन्हें संचालित करने के लिए सरकार ने बिना ब्याज धनराशि मुुहैया कराई थी लेकिन वर्तमान में डेयरियों की स्थिति बेहद खराब है। संचालकों ने सरकार की धनराशि अन्य मदों में खर्च कर ली है। ऐसे में वर्तमान सरकार काफी सख्त है और डेयरी बंद करने वाले संचालकों से ब्याज सहित धनराशि वसूलने की तैयारी की जा रही है।
बताते चलें कि जिले में कामधेनु डेयरी की संख्या पांच थी। इनमें से वर्तमान में मात्र वरुण वार्ष्णेय पुत्र राकेश वार्ष्णेय निवास इंद्रपुरी के अलावा अन्य चार पूरी तरह से बंद हैं। कामधेनु डेरी संचालन करने के लिए सरकार की ओर से एक करोड़ से अधिक की धनराशि बिना ब्याज मुहैया कराई गई थी। इसमें 100 दुधारू पशुओं का रखना अनिवार्य था। वहीं मिनी कामधेनु की 29 डेयरी संचालित थी। इनमें 50 दुधारू पशुओं का रखा जाना था। वर्तमान में इनमें से मात्र छह डेयरी संचालित है। इसी प्रकार माइक्रो कामधेनु की 41 डेयरी थी, जिनमें से वर्तमान में 27 संचाचिल है। कामधेनु और मिनी कामधेनु की संख्या बेहद निराशाजनक है। इस पर शासन ने सख्ती दिखाते हुए बंद इकाइयों के नाम से ली गई धनराशि को ब्याज सहित वसूल करने का फरमान जारी कर दिया है। इससे डेयरी संचालकों में हड़कंप है।
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शासन के मांगने पर कामधेनु की रिपोर्ट भेजी गई थी। इसकी स्थिति बेहद खराब मिलने पर सरकार की ओर से बंद इकाइयों से ब्याज सहित धनराशि वसूलने का आदेश प्राप्त हुआ है। इसको लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
केपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी