मैनपुरी। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण में फर्जीवाड़ा करना सचिवों को महंगा पड़ सकता है। स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक ने योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले सचिवों की सूची तलब की है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कहीं न कहीं इन सचिवों पर गाज गिर सकती है। वहीं सूची मांगे जाने के बाद सचिवों में भी हड़कंप मच गया है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले में 1.91 लाख शौचालयों का निर्माण किया जाना था। वर्ष 2017 तक ग्राम पंचायत निधि खाते में धनराशि भेजकर शौचालयों का निर्माण कराया गया। बाद में सीधे लाभार्थी के खाते में धनराशि भेजी जाने लगी। ग्राम पंचायत निधि खाते में धनराशि भेजे जाने के दौरान ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों ने जमकर फर्जीवाड़ा किया।
किसी ने शौचालय निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया तो किसी ने शौचालयों का निर्माण ही नहीं कराया। मामला खुलने के बाद कार्रवाई की झड़ी लग गई। अब तक एक दर्जन से अधिक पंचायत सचिवों को शौचालय निर्माण में घोटालों के लिए निलंबित किया जा चुका है। अब शासन ने ऐसे सचिवों की सूची तलब की है। इससे साफ है कि कहीं न कहीं शासन की मंशा फर्जीवाड़ा करने वाले सचिवों पर कार्रवाई करने की है।
केवल शौचालय निर्माण में ही नहीं बल्कि प्रशासन को रिपोर्ट भेजने में भी सचिवों ने जमकर फर्जीवाड़ा किया। 208 सचिवों ने बिना शौचालय निर्माण पूर्ण कराए ही जिला प्रशासन को गांव ओडीएफ होने का प्रस्ताव भेज दिया। जिला स्तर से भी इन गांवों को ओडीएफ कर दिया गया। मामला तब खुला जब मंडलीय टीम ने गांवों के सत्यापन के बाद इन्हें रिजेक्ट कर डीपीआरओ को रिपोर्ट भेजी।
डीपीआरओ ने इन सभी ग्राम प्रधान व सचिवों को नोटिस जारी कर दस दिन में शौचालय निर्माण कराने के आदेश दिए हैं। दस दिन में अगर शौचालय नहीं बनते हैं तो ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव पर एफआईआर कराई जाएगी।
बीते एक माह में ही कई सचिवों को निलंबित किया जा चुका है। हाल ही में ग्राम पंचायत भिड़ौरा, बिछिया विक्रमपुर, फतेहजंगपुर, मुहब्बतपुर आदि ग्राम पंचायतों के सचिवों को शौचालय निर्माण में फर्जीवाड़ा करने के लिए निलंबित किया जा चुका है। जबकि फतेजंगपुर की महिला प्रधान शीतला देवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि सचिव की तलाश जारी है।