कासगंज। शुक्रवार कोे भाईदूज पर्व है। वेद विद्वान सलाह देते हैं कि इस पर्व पर बहन के हाथ भोज करने से अकाल मृत्यु टल जाती है। भाईयों को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर चंद्र दर्शन भी करने चाहिए।
भाईदूज पर्व अपनी की अलग ही विशेषता है। मान्यता है कि इस दिन बहन विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना करती है तो भाई की दीर्घायु होती है। वेद विद्वान पंडित रामखिलावन शास्त्री का कहना है कि भाई बहन के प्यार का प्रतीक भाईदूज पर्व रक्षाबंधन की तरह है। रक्षाबंधन पर बहन रक्षासूत्र बांधती है और भाईदूज पर दीर्घायु की कामना करती है। वेद विद्वान का कहना है कि बहनें भाई की दौज करने से पहले यम पूजा करने के लिए व्रत रखें और भाईदूज के बाद एक दूसरे को मिष्ठान खिलाएं। भाईयों को चाहिए कि वे अपनी बहन के घर जाएं और वहां बहन के हाथ से बना भोजन गृहण करें। ऐसा करने से अकाल मृत्यु टलती है। भाईयों को रोली और अक्षत से तिलक करते हुए बहनें उनकी दीर्घायु की कामना करें। यदि यह पर्व विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन के साथ मनाया जाता है तो इसका अलग ही महत्व है।
ऐसे करें पूजन अर्चन
कासगंज। वेद विद्वान पंडित एसके त्रिपाठी ने पूजन अर्चन की विधि बताई है। उनका कहना है कि भैया दोज के दिन बहने आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं। रोली, चावल, घी का दीया, मिष्ठान से थाल सजाएं। कद्दू के फूल, सुपारी, मुद्रा हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी छोड़ें और फिर भाई के माथे पर तिलक लगाएं। हाथों पर कलावा बांधकर भाई को मिष्ठान आदि खिलाएं।
भाईदूज का शुभ मुहूर्त
कासगंज। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व के इस बार तीनों घड़ी में अलग अलग शुभ मुहूर्त हैं। सुबह 9:20 से 10:35 तक, दोपहर 1:20 से 3:15 तक, सायं 4:25 से 5:35 तक और 7:20 से रात 8:40 तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
भाई की सलामती को आज होगा तिलक
एटा। भाई की सलामती और लंबी उम्र के लिए शुक्रवार को बहनें तिलक करेंगी। पर्व को लेकर बहनों में काफी उत्साह है। गुरुवार को घरों में पर्व को लेकर तैयारियां चलती रहीं।
रक्षाबंधन के साथ ही भैया दौज का पर्व भाई-बहनों के अटूट स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगा और मिठाई खिलाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। पर्व को लेकर बहनों में खासा उत्साह देखने को मिला। भाई का मुंह मीठा करने के लिए बहुत सी बहनों ने घर पर ही मिठाइयां तैयार कीं। वहीं मायके और भाई के घर जाने के लिए गुरुवार को तैयारी चलती रहीं। भाई भी अपनी बहनों के घर दौज कराने को उत्सुक नजर आए। त्योहार पर भीड़भाड़ से बचने को कुछ बहनें पूर्व संध्या में ही मायके रवाना हो गई।
इसलिए मनाते हैं भाई दौज
जब मृत्यु के देवता यमराज से बहन यमुना ने दौज के दिन उनसे अपने भक्तों की रक्षा का वचन लिया था। यमराज ने इस दिन अपनी बहन के साथ यमुना में स्नान करने वालों को अकाल मृत्यु से मुक्त करने का वचन दिया था। इसी दिन सभी बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक करके यमराज से उनकी सलामती और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं।