एटा। आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री ने देश के गरीबों को सस्ते इलाज का सपना तो दिखा दिया। लेकिन इस सपने को साकार करने के लिए कोई खास प्रयास केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने नहीं किए। इस योजना में जनपद के तीन अस्पतालों का चयन किया गया। इनमें से दो सरकारी और एक प्राईवेट अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों की स्थिति और यहां मिलने वाली सुविधाओं पर नजर डालें तो गरीबों के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना धरातल पर पूरी तरह आने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है। आयुष्मान भारत योजना में की पड़ताल के क्रम में पेश ही पहली किश्त...
89 हजार परिवार को आस
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के 89 हजार परिवारों को शामिल किया गया है। इस योजना में शामिल लोग पांच लाख तक निशुल्क इलाज होने के आस में हैं। ऐसे में जिला प्रशासन पर उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी जिम्मेदारी है। इसे वह कैसे पूरा करेंगे यह अभी भविष्य के गर्त में हैं। योजना में 1300 से अधिक बीमारियों को शामिल किया गया है। इसके लिए जिले में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और जलेसर का एक निजी अस्पताल को शामिल किया गया है।
अब तक तो हैं रेफर सेंटर
गंभीर रूप से घायल, गंभीर बीमारी से पीड़ित सहित अन्य छोटी बड़ी जांचों के लिए जिला अस्पताल और जिला महिला चिकित्सालय में लोगों को रेफर स्लिप थमा दी जाती है। यहां अक्सर दवाओं का टोटा रहता है। मरीजों और उनके तीमारदारों को मेडिकल स्टोरों से दवा लेनी पड़ती है। अब आयुष्मान योजना से लोग इसमें सुधार की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर
12 चिकित्सको के पद है रिक्त
1300 से ज्यादा बीमारियों को योजना में किया गया है शामिल
89 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ
50 दवाओं का जिला अस्पताल में चल रहा है अभाव
वर्जन
उच्चाधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है। आयुष्मान योजना के शुरू होने से अब जल्द ही चिकित्सको के मिलने की उम्मीद है। शुरुआती दिनों में कुछ परेशानी होंगी। उनका जल्द समाधान निकाला जाएगा।
डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ