कासगंज। मानसून के सीजन के डेढ़ माह बीत चुका है। आठ साल में अब तक की इस बार सबसे कम बारिश हुई है। औसत से मात्र 13.8 प्रतिशत बारिश होने से शहर से लेकर देहात तक हाहाकार मचा है। फसलों की बोआई नहीं हो पा रही। भूमिगत जलस्तर में गिरावट आ रही है। उमस से लोगों का हाल बेहाल हो रहा है।
जनपद में यह पहला मौका नहीं है जब सूखे के हालात बने हों। पहले भी सूखा पड़ चुका है। वर्ष 2014 में सूखे के हालात बने थे, लेकिन तब भी इतनी कम बारिश नहीं हुई थी जितनी कम इस सीजन में हुई है। जनपद में जून व जुलाई माह में 175.2 मिमी बारिश का औसत है। इस बारिश से भूगर्भ जलस्तर ही नहीं खरीफ फसल की पैदावर भी निर्भर रहती है। किसान इस सीजन में मक्का, बाजरा, धान, मूंगफली, दलहन आदि प्रमुख फसलों की बोआई करता है। सबसे पहले मक्का की बोआई होती है। इसके साथ ही धान की पौध की रोपाई की जाती है। अब तक मात्र 24.3 मिमी बारिश हुई है। जो औसत बारिश का मात्र 13.8 प्रतिशत है। खेतों में नमी न बन पाने से परेवट तक नहीं हो पा रही, जिससे किसान के सामने फसल की बोआई का संकट है। किसान को डर सता रहा है कि यदि बारिश नहीं हुई तो वह बर्बाद हो जाएगा। इसका पूरा असर फसल चक्र पर पड़ेगा। खेतों में नमी न होने से रबी की फसल की बोआई में किसान को समस्या आएगी।
मुंह चिढ़ा रहे बादल
कासगंज। जनपद में बादल तो प्रतिदिन घिर रहे है। बादलों को देखकर बारिश होने की आस बंधती है, लेकिन बादल बिना बरसे ही लोगों को मुंह चिढ़ाकर चले जाते है। बारिश न होने पर लोग मायूस हैं।
मक्का के सूखने का सता रहा डर
कासगंज। किसान ने शुरू में कुछ दिन बारिश को देखकर 28343 हेक्टेयर में मक्का की फसल की बोआई तो कर ली, लेकिन अब सूखा के हालात होने से किसान को फसल सूखने का डर सता रहा है। जो किसान इस फसल की बोआई करने से वंचित रह गए, उन्हें बोआई की चिंता सता रही है।
जनपद में खरीफ के रकवे की स्थिति हेेक्टेयर में
फसल लक्ष्य बोआई
मक्का 30290 28343
बाजरा 39870 1987
उर्द 1103 389
मूंग 227 0
तिल 553 0
जनपद में आठ साल में जून व जुलाई की बारिश के आंकड़े
माह 2011 -2012- 2013- 2014- 2015- 2016- 2017- 2018
जून 172.73- 7.33- 232- 3.16- 173- 105 -136.33- 2.1
जुलाई 363.25- 248.66- 241.4- 124.33- 224- 325- 116.33- 22.2
बारिश न होने से जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। नलकूप से पानी की समस्या आने लगी है, जिससे फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है। फसलें सूखने के कगार पर हैं- हेतराम, किसान निवासी तोलकपुर सोरों
सूखा के हालात ने चिंता बढ़ा दी है। खरीफ की फसल की बोआई तो प्रभावित हो ही रही है। रबी के सीजन पर भी इसका असर पड़ेगा। खेतों में नमी न होने पर गेहूं की बोआई में दिक्कत हो जाएगी- मुन्नालाल मौर्य, किसान निवासी नगला काशी सोरों
जनपद में औसत से काफी कम बारिश हुई है, इससे सूखे के हालात हैं। इसका असर खरीफ के साथ ही रबी की बोवाई पर भी पर पड़ेगा-राजकुमार अपर जिला कृषि अधिकारी राजकुमार