सोरों कोतवाली क्षेत्र के नगला खंजी में सोमवार की सुबह हुए खूनी संघर्ष में एक युवक की भाला मारकर हत्या कर दी। जबकि उसके ही परिवार के 3 अन्य लोग लाठी, डंडो के प्रहार से गंभीर घायल हो गए। रंजिश के चलते हुए इस संघर्ष की घटना में आरोपियों ने लाठी, डंडे, पत्थर और भाले से हमला किया। घटना की सूचना पर पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंच गए। 7 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसमें एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
संघर्ष की घटना में हत्या का शिकार सुरेश बाल्मीकि (42) पुत्र रामदास हुआ। बताया गया कि सुरेश बाल्मीकि और प्रेमपाल बाल्मीकि पुत्र लाखन के बीच शराब के नशे में कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया। प्रेमपाल और उसके परिवार के लोगों ने लाठी, डंडे और भाला लेकर सुरेश व उसके परिवार के धर्मेंद्र, पप्पू और श्यामबाबू को घेर लिया। दोनों ओर से जमकर संघर्ष हुुआ जिसमें सुरेश के पेट में भाला घोंप दिया और लाठी, डंडो से उसके सिर व शरीर पर तमाम प्रहार किए जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। सुरेश को बचाने के लिए उसके परिवार के धर्मेंद्र, पप्पू, श्यामबाबू हमलावरों से संघर्ष करते रहे, लेकिन हमलावरों ने लाठी, डंडो से प्रहार करके उन्हें भी घायल कर दिया। हमलावर वारदात के बाद फरार हो गए। हत्या की सूचना पर सोरों कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीणा, अपर पुलिस अधीक्षक पवित्र मोहन त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने घेरा बंदी करके एक आरोपी लाखन को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में हत्या की रिपोर्ट सुरेश के पिता रामदास ने लाखन सहित प्रेमपाल, अमर सिंह, मोहन लाल, सोहन लाल, सूखी, सुखदेवी, निवासी नगला खंजी एवं छोटे लाल निवासी कुमरऊआ के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
12 साल पहले से चल रही थी रंजिश
कासगंज। लाखन और सुरेश के परिवार में पिछले 12 वर्ष से रंजिश चल रही थी। बताया गया कि लाखन की पत्नी की हत्या गांव के ही कुछ लोगों ने कर दी थी। हत्या के इस मामले में सुरेश बाल्मीकि के परिवार ने लाखन का सहयोग नहीं किया इसी बात से लाखन और उसके परिवारीजन रंजिश मानते थे। आए दिन दोनों के परिवारों में झगड़ा होता था। तीन दिन पूर्व भी दोनों ही परिवारों के बीच झगड़ा हुआ था, लेकिन गांव के लोगों ने पंचायत करके मामला शांत करा दिया।
रविवार की शाम ही दिल्ली से लौटा था सुरेश
कासगंज। संघर्ष में हत्या का शिकार हुआ सुरेश बाल्मीकि दिल्ली में स्वीपर का काम करता था। वह और उसका परिवार दिल्ली में रहता है। एक दिन पूर्व वह दिल्ली से गांव आया था। काफी समय से वह गांव में नहीं आया था इसलिए वह अपने परिवार के लोगों से मिलने के लिए पहुंचा था। उसकी पत्नी आशा देवी को जब इस वारदात की जानकारी मिली तो वह दिल्ली से यहां आ गईं। पत्नी को इस बात का अफसोस था कि वह एक दिन पूर्व ही परिवार की राजी खुशी जानने के लिए आए थे, लेकिन इस तरह हत्या का शिकार होंगे यह सोचा न था। सुरेश के परिवार में 6 बच्चे हैं।
गांव में तैनात की पुलिस
कासगंज। संघर्ष की घटना में हत्या हो जाने के बाद पुलिस प्रशासन काफी मुस्तैद नजर आया। एक ही गांव के दोनों पक्ष होने के कारण गांव में पुलिस की तैनाती कर दी गई है। जिससे फिर से कोई झगड़े की स्थिति न बन पाए।