एटा। साक्षरता में पिछड़ने वाली जिले की महिलाएं अब पुरुषों को पछाड़ रही हैं। वर्ष 2015 के बाद जिले में साक्षरता की दर ही नहीं बढ़ी वरन महिलाओं की दर साठ प्रतिशत तक पहुंच गई है। साक्षर भारत मिशन के आंकड़ों के अनुसार 2014 तक महिलाओं का प्रतिशत आधे से कम था।
वर्ष 2014 के बाद साक्षर भारत मिशन के परिणामों में सुधार आ रहा है। लोक शिक्षा समितियों में जहां निरक्षरों का पंजीकरण बढ़ा वहीं साक्षरों के प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं दशकों से पिछड़ रही महिलाओं की साक्षरता दर में सुधार ही नहीं हुआ वरन वे पुरुषों से आगे भी निकल गई हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2016 के साक्षर लोग 2012 व 2013 से पांच गुना हैं।
वर्ष कुल साक्षर साक्षर पुरुष साक्षर महिलाएं
2012 11774 6722 5052
2013 12006 6423 5583
2014 13190 6787 6403
2015 23083 9796 13287
2016 59173 24378 34795
2017 छमाही 16868 8164 8704
(नोट: कुल जनसंख्या में प्रतिवर्ष इतने साक्षर बढ़े हैं)
वर्ष 2014 के बाद अभियान में सक्रियता आई वहीं निरक्षरों का भी पंजीकरण बढ़ा। इनमें महिलाओं का प्रतिशत पूर्व वर्षों से कहीं अधिक रहा।
रवींद्र भारद्वाज, जिला समन्वयक, साक्षर भारत मिशन