वृंदावन (मथुरा)। प्रशासन और भूमाफिया के गठजोड़ की चक्की में आम आदमी पिसने को मजबूर है। बीते 20 साल में यमुना खादर की जमीनें आबाद होती रहीं और प्रशासन सोता रहा। समय रहते इस दिशा में कदम उठा लिए गए होते तो न आज आम आदमी पथराई आंखों से अपने आशियानों को उजड़ते देखने को मजबूर होता।
खादर में वृंदावन की ओर का एक बड़ा हिस्सा वृंदावन खादर के साथ ही जहांगीरपुर खादर, मांट खादर, पानीगांव खादर और राजपुर खादर लगता हैै। ऐसे में राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और एमवीडीए को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने का मौका मिला और यहीं से शुरू हुआ खादर की जमीनों के माफियाकरण का दौर। 1995 के बाद यमुना खादर पर कब्जे हुए और कई बड़े और प्रभावशाली लोगों ने इन जमीनों को बेचकर चांदी काटी। नगर पालिका से पानी और सीवर की लाइन, विद्युत विभाग ने बिजली कनेक्शन और विधायकों की निधि से सड़कों के हुए निर्माण ने लोगों के भरोसे को कायम रखा, लेकिन हाईकोर्ट के एक निर्णय ने अवैध विकास को कटघरे में ला खड़ा किया।
नोटिस भेजते रहे पर निर्माण न रोक सके अफसर
वृंदावन। यमुना खादर में कालोनियों के बसने के बाद हुई शिकायत पर वर्ष 2003 में प्रशासन ने 63 लोगों को नोटिस जारी किए इसके बाद वर्ष 2010 में 87 लोगों को समन भेजे। लेकिन निर्माण और जमीन बिक्री का खेल जारी रहा। मधुमंगल शुक्ला ने 2010 में खादर में निर्माण पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका दायर की। इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए।
गरीब को दरदर भटकने पर मजबूर कर रहा प्रशासन
वृंदावन। गरीब एकता दल की शनिवार को भक्ति निकेतन में हुई बैठक में प्रशासन द्वारा खादर में किए जा रहे ध्वस्तीकरण पर रोष जताया गया। सुधीर शुक्ला ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन प्रशासन कर रहा है, परंतु शासन का कोई प्रतिनिधि गरीब जनता के दु:ख दर्द में उनके साथ नजर नहीं आता। स्वामी स्वतंत्रानंद एवं बाबा मदन बिहारी दास ने भी विचार रखे। विवेक महाजन, पुनीत द्विवेदी, अभय वशिष्ठ, सुधीर शुक्ला, अमित गौतम, दीपक गोयल, प्रवीन अग्रवाल, संतोष शर्मा, श्याम पंडित उपस्थित थे।