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देवी मां के नौ स्वरूप स्थापित हैं नवदुर्गा सिद्ध पीठ में

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देवी मां के नौ स्वरूप स्थापित हैं नवदुर्गा सिद्ध पीठ में - फोटो : अमर उजाला
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सोरों (कासगंज)।
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सोरों सूकर क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों की श्रंखला में नवदुर्गा सिद्धपीठ मंदिर भी सिद्ध स्थल है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की दिव्य प्रतिमा गंगा स्नान करते समय गंगा भक्त पुरोहित को वर्षों पूर्व मिली थी। जानकार इसे 18वीं शताब्दी की स्थापित सिद्धपीठ मानते हैं।
लहरा गंगाघाट मार्ग पर यह प्राचीन नवदुर्गा मंदिर मां आदि शक्ति के नौ स्वरूपों की प्राचीन सिद्धपीठ है। प्राचीन समय में भागीरथी गंगा इस मंदिर के पास से होकर बहती थी। देवी भक्त पुरोहित पंडित सियाराम मिश्रा प्रतिदिन गंगा स्नान करते थे। गंगा स्नान के दौरान गंगा में प्रकट हुई नौ स्वरूपों की भव्य प्रतिमा उन्हें मिली तो वे दिव्य प्रतिमा को अपने साथ ले आए और उस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा विधि विधान से कर दी।
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पुरोहित सियाराम स्वयं देवी की उपासना करने लगे। धीरे-धीरे इस मंदिर का स्वरूप बदलता रहा। पहले छोटा मंदिर था फिर इसका विस्तार होता चला गया। आज भी पंडित सियाराम के वंशज ब्रह्मानंद मिश्रा इस सिद्धपीठ पर उपासना व सेवा का कार्य करते हैं। प्रतिदिन ही यहां श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला रहता है। महायज्ञ, महाआरती, देवी जागरण के आयोजन नवरात्रों पर आयोजित किए जाते हैं। देवी भक्त मंदिर में पहुंचकर अपनी साधना करते हैं। कुछ भक्त तो नित्य प्रति ही इस साधना स्थल पर पहुंचते हैं। मंदिर के सेवायत पंडित ब्रह्मानंद मिश्रा बताते हैं कि आदि शक्ति मां दुर्गा बड़ी दयालु है। इस दर पर आने वाला कभी निराश होकर नहीं गया।
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