आगरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान और खुले में शौच मुक्त भारत की योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। लेकिन इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि भारतीय जनता पार्टी के मेयर इंद्रजीत आर्य पांच वर्ष के कार्यकाल में अपने मोहल्ले में ही शौचालय का निर्माण नहीं करा पाए।
उनके मोहल्ले की महिलाएं रेल ट्रैक पर पुरुष आसपास के इलाकों में शौच के लिए जाते हैं। इतना ही नहीं, अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में मेयर शहर में तमाम शौचालयों का लोकार्पण कर चुके हैं लेकिन हैरत की बात है कि उनके मोहल्ले में एक भी सामुदायिक शौचालय नहीं है।
स्थानीय प्रशासन भी शौच मुक्त आगरा बनाने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहा है। शहर में निजी शौचालय निर्माण के लिए करीब 8000 आवेदन आए हैं। नगर निगम करोड़ों रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय बना रहा है।
क्षेत्रीय निवासियों के मुताबिक सोरों कटरा, शाहगंज स्थित उनके मोहल्ले में समाज के करीब 100 घर हैं। वहां केवल दो घरों में शौचालय हैं। एक स्वयं मेयर इंद्रजीत आर्य के घर में और एक अन्य मकान में ये निजी शौचालय हैं। लोगों का कहना है कि महिलाएं आगरा-दिल्ली रेल ट्रैक पर शौच के लिए जाती हैं। पुरुष मॉडल स्कूल के आसपास के खुले स्थानों पर शौच के लिए जाते हैं।
इस संबंध में मेयर इंद्रजीत आर्य से वार्ता नहीं हो सकी है। लेकिन उनके पुत्र रवि आर्य ने बताया कि मोहल्ले में 16 सीटर शौचालय है। हमारे मोहल्ले की महिलाएं शौच के लिए ट्रैक पर नहीं जातीं है। अब सवाल है कि जब उनकी बस्ती में शौचालय है तो महिलाएं रेल ट्रैक पर क्यों जाती हैं? अब तक किसी भी घर में निजी शौचालय क्यों नहीं बन पाए? जबकि अधिकांश घरों में शौचालय बनाने का स्थान है।