मथुरा जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चुने गए 879 क्षेत्र पंचायत सदस्यों में से 167 बिल्कुल निरक्षर हैं। आधे से अधिक जो साक्षर हैं, उन्होंने भी सिर्फ गांव के स्कूल का ही मुंह देखा है। गांव के विकास की तमाम सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले क्षेत्र पंचायत सदस्य योजनाओं को समझने के लिए दूसरों की वैशाखी पर निर्भर रहेंगे।
शिक्षा का भले ही प्रचार प्रसार किया जा रहा हो लेकिन गांवों में आज भी निरक्षर ही हावी हैं। इस कारण गांवों के शिक्षित लोग विकास के लिए चुनी जाने वाली सरकार का या तो चुनाव ही नहीं लड़ते या फिर लोग उनका चयन नहीं करते हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चुने गए कुल जनप्रतिनिधियों में आधे से अधिक की शिक्षा प्राइमरी तक ही है।
क्षेत्रवार निरक्षर विजयी प्रत्याशी
इसके अलावा जो शिक्षित हैं, उनमें से पांच प्रतिशत क्षेत्र पंचायत सदस्य ही इंटरमीडिएट या स्नातक तक की शिक्षा पाए हैं। मथुरा ब्लॉक में 69 में से 14 निरक्षर, गोवर्धन ब्लॉक में 89 में से 38 निरक्षर, बलदेव ब्लॉक 93 में से 8 निरक्षर, फरह ब्लॉक में 77 में से कुल 16 निरक्षर हैं।