मैनपुरी। सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे जल्द निस्तारित होंगे। लंबित मामलों में अब विलंब नहीं होगा। आम तौर पर दिए जाने वाले स्थगन प्रार्थना पत्र सामान्य परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। गवाहों की निर्धारित तिथि पर हर हाल में गवाही भी होगी।
विभिन्न मामलों में आमतौर पर सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करा दिए जाते हैं। पुलिस भी जांच के बाद किसी न किसी वजह से इन मामलों में चार्जशीट लगा देती है।
जब मुकदमों की सुनवाई शुरू होती है तो रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लोग अदालत में गवाही देने नहीं आते हैं। मुकदमे लंबित होने से अदालतों पर काम का बोझ भी बढ़ जाता है। हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के लंबित मुकदमों को सूचीबद्ध करके शीघ्र निस्तारित करने को कहा है। दीवानी न्यायालय में चल रहे 63 मुकदमे सूचीबद्ध किए गए हैं। हर हाल में निर्धारित तिथि पर गवाहों की गवाही कराने को कहा गया है। बिना गवाही दिए अदालत से गवाह लौटने पर दूसरे पक्ष पर जुर्माना तक लगाया जा सकता है।
आपसी मनमुटाव के चलते लोग सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं। मुकदमा शुरू होने पर गवाही के समय मुकदमे को लटकाते हैं। जिससे अदालत के समय की बर्बादी होती है। नई प्रक्रिया से अदालतों पर काम का बोझ कम होगा।
चतुर सिंह, पूर्व डीजीसी
अदालतों में मुकदमों को बोझ कम करने के लिए कड़ाई होना जरूरी है। सामान्य मुकदमों को भी लंबित बनाने वालों पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। निर्धारित तिथि पर गवाही नहीं हो पाने पर दूसरे पक्ष पर जुर्माना लगाने से दूसरे पक्ष की मनोवृति कमजोर होगी।
संजय चौहान, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन