मैनपुरी। जिले में प्रशिक्षकों के अभाव में खेल प्रतिभाओं का दमन हो रहा है। दो करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए तरण ताल में प्रशिक्षक न होने के कारण तैराक नहीं पहुंच रहे हैं। तैराकी के सौकीन कई बार इसकी मांग भी कर चुके हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जनपद में डेढ़ दशक पहले जब दो करोड़ की लागत से तरण ताल का निर्माण हुआ था। तब तैराकी के सौकीन लोगों ने सोचा था कि वह भी बेहतर प्रशिक्षण पाकर जिले का मंडल, प्रदेश और देश में नाम रोशन करेंगे, लेकिन तरण ताल के निर्माण के बाद यहां कोई प्रशिक्षक नहीं भेजा गया।
केवल जीवन रक्षक के रूप में रमेश कुमार की तैनाती है। यहां प्रशिक्षक के न आने के कारण जनपद में तैराकी की प्रतिभा रखने वाले लोगों की इच्छाएं दम घोंटती नजर आ रही हैं। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थित तरण ताल केवल लोगों का स्नानागार बनकर ही रह गया है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में संचालित तरण ताल केवल गर्मियों के समय लोगों के लिए खोला जाता है। लोग यहां सुबह और शाम लुत्फ उठाने जाते हैं। तैराकी के सौकीन लोगों के लिए यहां कोई भी व्यवस्था नहीं है।
तरण ताल में प्रशिक्षक की तैनाती न होने के कारण यहां तैराकी की प्रतियोगिताएं भी नहीं होती हैं। डेढ़ दशक में जनपद से एक भी तैराक नहीं निकला जो जनपद का नाम रोशन करता। तैराकी की प्रतिभाओं को इसका मलाल है कि काश प्रशिक्षक होता तो वे भी जिले का नाम रोशन करते।
तैराकी के प्रशिक्षक की मांग कई बार की गई। प्रस्ताव तैयार कर खेल विभाग को भेजा गया, लेकिन प्रशिक्षक नहीं मिल सका। पुन: प्रस्ताव तैयार कर भेजा जा रहा है।
संजीव वर्मा, प्रभारी क्रीड़ाधिकारी