गांव नरदौली में रविवार सुबह मोबाइल आटा चक्की फटने से हादसा हो गया। इसमेें महिला, बच्चों सहित कुल 5 ग्रामीण घायल हो गए। हादसे में घायल बालक की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया।
चक्की फटने की घटना सुबह करीब 10 बजे हुई, जब गांव में राजवीर के घर के बाहर ट्रैक्टर के माध्यम से मोबाइल आटा चक्की से गेहूं पीसा जा रहा था। चक्की संचालक लाला राम निवासी ग्राम अलोखर चक्की चला रहा था। गेहूं पिसवाने के लिए लोग चक्की के पास खड़े हुए थे। तभी अचानक जोरदार आवाज के साथ चक्की फट गई। उसमें लगा पत्थर टूटकर लोगों को जा लगा।
इससे कई लोग घायल हो गए। घायलों में शिवराम (6) पुत्र नेमचंद्र उसकी बहन बबली (8), उसकी मां संगीता (35) एवं उसका पिता नेमचंद्र भी घायल हुआ। बालक शिवराम के गंभीर चोटें थीं। निजी चिकित्सक के यहां उसका इलाज कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। उसकी मां संगीता को रेफर कर दिया गया। पिता नेमचंद्र को हल्की चोटें थीं। वहीं ग्रामीण राजवीर एवं बहोरन भी चक्की फटने के हादसे का शिकार हुए। घायलों को पटियाली के चिकित्सालय लाया गया। दुर्घटना की सूचना पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मोबाइल आटा चक्की और ट्रैक्टर को अपने कब्जे में ले लिया है।
एंबुलेंस नहीं मिली तो हाथों में ही बच्चे के शव को लेकर गांव जाने लगा नेमचंद्र
आटा चक्की के हादसे में अपने 6 वर्ष के बालक शिवराम की मौत हो जाने से नेमचंद्र बेहद आहत था। उसकी समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। क्यों कि इस हादसे में वह खुद भी चोटिल था, उसकी पत्नी संगीता एवं पुत्री बबली भी घायल थे। उसके पास न पत्नी और बच्चे के इलाज के लिए पैसे थे और न ही पटियाली से बच्चे के शव को नरदौली लाने के लिए पैसे थे।
ऐसी स्थिति में एंबुलेंस संचालक ने शव ले जाने से मना कर दिया, तो नेमचंद्र अपने बच्चे को हाथ में ही उठाकर पटियाली के बाजार से होते हुए गांव की ओर जाने लगा। यह नजारा देखकर लोग भावुक हो उठे। तभी एक बाइक सवार ने नेमचंद्र को अपनी बाइक पर बैठाकर उसके गांव नरदौली तक छोड़ा और नेमचंद्र बाइक से अपने बच्चे के शव को लेकर गांव पहुंचा। ग्रामीणों ने नेमचंद्र को पत्नी और बच्चों के इलाज के लिए आर्थिक मदद भी दी।
नहीं की गई शव वाहन की मांग
सीएमओ डॉ. रंगजी दुबे का कहना है कि जिले में एक शव वाहन जिला चिकित्सालय पर उपलब्ध है। बालक की मौत हो जाने पर यदि शव वाहन की मांग की जाती तो उसे उपलब्ध कराया जा सकता था। एंबुलेंस से शव नहीं ले जाया जा सकता।