मथुरा। बैंकों में चेक और ड्रॉफ्ट के क्लियर होने की नई व्यवस्था ने बाजार में भुगतान का संकट खड़ा कर दिया है। मशीन से चेक को क्लियर करने की व्यवस्था में करीब 20 हजार चेक फंस गए हैं इनका करीब 100 करोड़ का भुगतान फिलहाल अटक गया है।
भारतीय स्टेट बैंक के क्लीयरिंग हाउस में प्रतिदिन 15 से 25 करोड़ के चेक क्लियर होते थे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने एक अप्रैल से सभी बैंकों में चेक क्लियर करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लागू किया है। अब चेक या ड्रॉफ्ट क्लीयरिंग हाउस में न जाकर इसी सिस्टम से भेजे जा रहे हैं जिन्हें सीडीएस सेंटर क्लियर कर रहा है।
संकट की बात ये है कि बीते दस दिन से लागू हुई इस नई व्यवस्था में बामुश्किल आधे ही चेक क्लियर हो सके हैं। ऐसे में 20 हजार चेकों की करीब 100 करोड़ की धनराशि अटक गई है। इस धनराशि का भुगतान न होने से बाजार में धन का संकट खड़ा हो गया है। चांदी कारोबारी राजेंद्र अग्रवाल ने बताया एक अप्रैल को कई व्यापारिक प्रतिष्ठान, मजदूरों को दिए चेक अभी तक क्लियर नहीं हुए है। अब वो लोग उनसे भुगतान मांग रहे हैं।
इधर, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य शाखा प्रबंधक नवल किशोर अग्रवाल ने बताया क्लीयरिंग में थोड़ी दिक्कत आ रही है। हमारे यहां 11 मशीनें आईं हैं इनमें से दो ने काम करना शुरू कर दिया है। एक दो दिन में क्लीयरिंग का कार्य सुचारु हो जाएगा।
एक अप्रैल से रिजर्व बैंक ने क्लीयरिंग की जो व्यवस्था लागू की है उसके लिए बैंक कर्मियों को ट्रेनिंग नहीं दी गई। यह ही वजह है कि क्लीयरिंग की नई व्यवस्था में बड़ी संख्या में चेेक फंस गए हैं। धीरे-धीरे व्यवस्था सुचारु हो रही है।
केके पांडेय, जिला अध्यक्ष, यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन मथुरा।