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ये सर्जिकल तो झांकी है, शीघ्र जलेगी तेरी लंका अभी दशहरा बाकी है...

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फिरोजाबाद। भगवान महावीर जयंती महोत्सव के समापन पर शनिवार रात अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में कवियों ने वीर, हास्य एवं श्रृंगार रस की कविताएं सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कवि सम्मेलन का शुरभारंभ मुकेश जैन ने किया। चित्रानावरण प्रवीन कुमार जैन, दीप प्रज्वलन प्रमोद कुमार ,अमित कुमार जैन ने किया। सर्वप्रथम कवि कमलेश बसंत तिजारा ने सुनाया कि मुंबई और पठानकोट का अभी हिसाब बकाया है, सुनले दाउल-हाफिज नवाज हमने केवल चौकाया है, एक के बदले दो को मारो ये सर्जिकल तो झॉकी है, शीघ्र जलेगी तेरी लंका अभी दशहरा बाकी है...।
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कवियत्री प्रिया खूशबु ने श्रृंगार रस की कविता बसे मन मालवा माटी के मीठे भाव लाई हूॅं, गजल के घूंघरूओं के मैं बजाने पांव आई हूं..। कवि अजय अंजाम औरैया ने सुनाया कश्मीर का दर्रा दर्रा वंदेमातर बोलेगा, कारतूस का छर्रा छर्रा वंदेमातरम बोलेगा, जिस दिन भारत मां के बेटे अपनी पर आ जाएंगे, इस मिट्टी का जर्रा जर्रा वंदेमातरम बोलेगा...। यशपाल यश ने सुनाया कि दर्द के नयन का नीर हो जाएगा, काम को जीत ले वीर हो जाएगा...। कवियत्री संध्या विश्व ने सुनाया कि सत्य है झूठ के पांव होते नही,ं सर्प में दूध के दांत होते नहीं, जिस नदी में बहे आदमी का लहू उस नदी में कभी हाथ धोते नहीं...। वीर रस के कवि कलाम भारती ने सदियों से सतपथ पर चलना और संयम सिखलाता है। शांति अहिंसा शाकाहार का मार्ग सुगम बतलाता है।
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त्याग तपस्या में तन तपकर मोक्ष गमन कर जाता है, जिन से जो पहुंचा जन जन तक जैन धर्म कहलाता है...। दीपिका माही ने सुनाया कि तुम्हारी बात में जादू नयन वाचाल लगते है, तुम्हारे बिन मुझे सुख चैन सब जंजाल लगते है, मैं अपने प्रेम को आकार देने में झिझकती हूं, जरा सी बात कहने में हजारों साल लगते हैं...। संचालन कवि सुरेंद्र सार्थक अलवर ने किया। शैलेंद्र जैन, संजय जैन पीआरओ, टोनी जैन, अजय जैन बजाज, राहुल जैन, मनोज जैन, गौरव जैन, संजीव जैन, ओमप्रकाश जैन, रमेश चंद्र जैन, पंकज जैन, प्रमोद जैन मौजूद रहे।
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