फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले के शीत गृहों में 50 हजार क्विंटल आलू फंसा

विज्ञापन
potatoes - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कासगंज।
विज्ञापन

आलू किसान और शीत गृह संचालकों पर एक बार फिर मंदी की मार पड़ी है। लगातार दूसरे वर्ष की मंदी ने किसान और शीतगृह संचालकों की कमर तोड़ दी है। जिले के शीत गृहों में 50 हजार क्विंटल आलू फंसा है। किसानों ने अपना आलू यूं ही शीत गृहों में छोड़ दिया है। वहीं निकासी न होने से शीत गृह संचालक परेशान हैं। आलू की 50 किलो की बोरी 20 से 100 रुपये तक बिक रही है।
आलू किसानों का पिछले वर्ष नोट बंदी के कारण मंदी की मार का सामना करना पड़ा। तमाम किसानों को आलू के भाव कम होने के कारण फेंकना पड़ गया। जिन किसानों ने शीतगृहों में अपना भंडारित किया था वे किसान भी आलू की निकासी नहीं कर रहे। वहीं आलू व्यापारियों के द्वारा किए गए आलू भंडारण की निकासी भी नहीं की गई है। आलू भंडारण का सत्र तीन दिन बाद 30 नवंबर को समाप्त हो जाएगा, लेकिन 50 हजार क्विंटल आलू अभी भी शीतगृहों में रखा हुआ है। शीत गृह संचालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे आलू का क्या करें। क्योंकि भंडारणकर्ता आलू की निकासी नहीं कर रहे। यदि शीतगृह संचालक भंडारित आलू को निकालकर बाहर करते हैं तो आलू सड़ जाएगा और इससे वातावरण में प्रदूषण फैलेगा। शीतगृह संचालकों केा आलू का किराया भी नहीं मिल पा रहा। बाजार में नए आलू की आवक भी आ गई है। जिससे पुराने आलू की बिक्री बेहद प्रभावित है। शीतगृह संचालकों के सामने आलू भंडारित होने के कारण शीतगृह के अनुरक्षण कार्य कराने की भी समस्या है। आलू के भाव इतने गिर जाएंगे इसका अनुमान न किसानों को था और न ही आलू व्यापारियों को। बड़ी आर्थिक क्षति का सामना आलू कारोबारियों, किसानों और शीतगृह संचालकों को करना पड़ रहा है। शासन प्रशासन को अभी तक इस समस्या की सुध नहीं है।
विज्ञापन

सरकार खरीदे किसानों का आलू
शीतगृह संचालक शिवम अग्रवाल का कहना है कि आलू किसानों को काफी क्षति का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि वे किसानों के भंडारित आलू की सरकारी एजेंसी से खरीद कराए जिससे किसानों को भंडारित आलू की कीमत मिल सके और उन्हें घाटे से उबारा जा सके।
आलू की बाजार में नहीं है मांग- मुकेश
कासगंज।
शीतगृह संघ के संयोजक मुकेश शर्मा का कहना है कि आलू की बाजार में मांग नहीं है। बार-बार भंडारण कर्ताओं को मोबाइल पर एवं संदेश वाहक के माध्यम से आलू निकासी की सूचना दी जा रही है, लेकिन बाजार में कीमत न मिलने के कारण भंडारणकर्ता आलू नहीं निकाल रहे।
विज्ञापन

सरकार पर ही भरोसा- चंद्रभान
कासगंज। तवालपुर गांव के किसान चंद्रभान का कहना है कि उसने अपना आलू शीतगृह में भंडारित किया था। उन्हें भरोसा था की इस बार ऊंची कीमत रहेगी, लेकिन आलू की कीमत नहीं मिल पा रही। उन्होंने कहा कि सरकार ही किसानों को इस संकट से उबार सकती है। सरकार को चाहिए कि किसान का आलू खरीदे, किसान का आलू फेंका न जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें