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गूंजे या अली, या हुसैन के नारे

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जुलूस-ए-ताजिया
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मैनपुरी/करहल। हजरत इमाम हुसैन की याद में अलमों और ताजियों का जुलूस निकाले जाने का सिलसिला जारी है। मजलिसों में इमाम हुसैन की याद की जा रही है। नगर के कई मोहल्लों से अलग-अलग अलम निकाले जा रहे हैं। इमाम हुसैन की याद में लोगों में गम का माहौल है।
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अलमों को निकालने वाले अली का लश्कर या हुसैन जैसे नारे लगा रहे थे। चांद की नौमी तारीख को देर शाम सभी ताजियों ने इमाम चौक से आकर बड़ा चौहारा पर सलामी दी। इमामबाड़ा से शुरू हुआ ताजियों का गश्त बड़े चौराहे पर पहुंचा।

यहां रात भर इमाम हसन-हुसैन की याद में अखाडे़दारों ने जमकर तलवार से अखाड़ा किया। मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष आजम खां ने बताया कि दिल्ली और मुरादाबाद से आए ढोल ताशे वालों ने इस दौरान बड़ा चौराहा पर कार्यक्रम पेश किया। देर रात तक बड़ा चौराहा पर अखाड़ा हुआ, ताजिए रखे गए।
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हुसैन की याद में छबील लगाकर शर्बत, बिरियानी, खीर, हलवा और मलीदा आदि तकसीम किया गया। साथ ही इमामबाड़ा पहुंचकर लोगों ने मुराद पूरी होने पर मेहंदी चढ़ाई। इस मौके पर मोहम्मद फैसल, अमन वारसी, फिरोज हुसैन, मोहम्मद आकिब, आलम, खुरशीद, अरवाज अली, रिशाद, साजिब अली, सुबहान, सोहेल कुरैसी, मोहम्मद अरमान, शाकिब आदि ने स्टाल लगाकर तबर्रुक बांटा।


इमामबाड़ा में इस दौरान मजलिस हुई। इसमें जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शमी अहमद ने कहा कि जो इमाम हुसैन को खतावार और यजीद को पाक साफ बताएगा और यजीद की हिमायत करेगा वह कयामत के दिन खुदा की रहमत से दूर होगा।

करबला के मैदान में खुद को और अपने खानदान को खुदा की राह में कुर्बान करके और तलवारों के साए में आखिरी बेमिसाल सजदा अदा करके हमें यह सबक दिया है कि यदि कामयाबी चाहते हो तो परेशानी की हालत में भी नमाज न छोड़ना।


करहल में मुहर्रम की नौ तारीख को नगर में ताजियों के जुलूस का भ्रमण देर रात शुरू हो गया जो रातभर जारी रहेगा। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम बुजुर्ग, नौजवान और बच्चे शिरकत कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

ताजिया जुलूस में सबसे आगे जुल्फिकार चल रहे थे जिन पर महिलाओं व पुरुषों द्वारा मन्नती नीबू चढ़ाए जा रहे थे। जुलूस में ढोल, तांसे, नगाड़ों व बाजों की धुन से माहौल को गमगीन बनाया। गम-ए हुसैन में डूबे जुलूस के आखिर में ताजियों को रखा गया है। इनकी सजावट कई दिनों से चल रही थी।

इस ताजिया जुलूस में हिंदुओं ने भी शिरकत कर हजरत इमाम हुसैन को श्रृद्धांजलि दी। जुलूस के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं घटे, इसके लिए पुलिस का बड़ा दस्ता लगातार साथ चल रहा है। रविवार को मुहर्रम की 10 तारीख होने से ताजियों को करबला ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाएगा।
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