फिरोजाबाद। श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव के तहत रविवार को रामलीला मैदान में श्रीराम-लक्ष्मण की सुग्रीव से मित्रता और श्रीराम द्वारा सुग्रीव को पंपापुर का राजपाठ सौंपने की लीला का मंचन हुआ।
प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण का डोला रामलीला मैदान में पहुंचने के साथ आचार्य लीला वाचन शुरू करते हैं। श्रीराम-लक्ष्मण सीता की खोज में वन में भटकते हुए शबरी की कुटिया पहुंचते हैं। जहां भगवान राम, लक्ष्मण स्वागत के लिए शबरी बेर लेकर आती हैं।
वह चख-चख कर श्रीराम को मीठे बेर खिलाती हैं। यहां से प्रभु श्रीराम का किष्किंधा पर्वत की ओर चल देते हैं। वीर हनुमान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण को कंधे पर बैठाकर सुग्रीव के पास लेकर पहुंचते हैं। श्रीराम, लक्ष्मण, सुग्रीव की बातों में कई दिन बीत जाते हैं।
श्रीराम को सुग्रीव ने बताते हैं कि वे अपने भाई बालि के डर से पर्वत पर रहने को मजबूर है। जो कोई एक तीर से सात वृक्षों को गिरा देगा, वही बाली का वध कर सकता है। लीला मंचन के बाद श्रीराम-लक्ष्मण की आरती उतारी जाती है।