फिरोजाबाद। सरकार ने गर्भस्थ शिशुओं के जन्म के बाद सेहत की निगरानी के लिए कई योजनाएं चला रखीं हैं। इसके बाद भी मां की कोख में शिशु दम तोड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार छह माह में 134 गर्भस्थ शिशुओं की मौत हो चुकी है। यानि हर माह औसतन 22 शिशु मां की कोख में दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में सभी योजनाएं निरर्थक साबित हो रहीं हैं। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूर है,जिससे शिशु की औसत मौत कम हो सके।
शिशु सुरक्षा योजना में कई स्तर पर निगरानी का प्रबंध है। शिशु सुरक्षा के लिए आशा से लेकर एएनएम तक नजर रख रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत एनीमिया के कारण आ रही है। उनका सही तरीके से पोषण न होने के कारण समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। महिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी से लेकर जून तक अब तक 134 गर्भस्थ शिशुओं ने दम तोड़ दिया।
जिला कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक रवि कुमार की मानें तो गर्भ का पता चलते ही गांव में तैनात आशा एवं एएनएम गर्भवती का रजिस्ट्रेशन कराती हैं। प्रसव पूर्व उनकी जांच कराई जाती है। अल्ट्रासाउंड के साथ ही खून का भी चेकअप कराया जाता है।
हर सप्ताह बुधवार और शनिवार को ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस पर गर्भवतियों के सेहत की जांच की जाती है। हाईरिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं के सेहत की जांच की जाती है। उनकी सेहत पर विशेष नजर रखी जाती है। हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान पर ऐसे मामलों पर विशेष फोकस किया जाता है।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. साधना राठौर का कहना है कि गर्भ में शिशु की मृत्यु की कई वजह होती हैं। किसी में इंफेक्शन की दिक्कत तो किसी में अन्य बीमारियों व एनीमिया भी कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में ऐसे शिशु शामिल होते हैं, जिनकी जन्म लेने के बाद सांस लेने में परेशानी व अन्य कारणों से मौत हो जाती है।
सीएमओ डॉ. एसके दीक्षित का कहना है कि शिशु सुरक्षा कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। स्थिति में पहले से सुधार हो रहा है।
आंकड़ों में गर्भस्थ शिशु की मौत
माह मृत शिशु की संख्या
जनवरी- 30
फरवरी- 19
मार्च- 17
अप्रैल- 18
मई- 22
जून- 28