वृंदावन (मथुरा)। प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही के कारण वृंदावन, राजपुर और पानीगांव खादर की जमीन पर लगभग दो दर्जन अवैध कालोनियां बस गईं और अधिकारी सोते रहे। यमुना घाटों से दूर होती चली गई और वास्तविक वृंदावन कहीं ओझल हो गया। इस मामले में हाईकोर्ट के कड़े तेवर देखकर प्रशासनिक अमले में हड़कंप है।
वृंदावन में आसमान छूते जमीनों के भाव के चलते पिछले एक दशक में वृंदावन बांगर और खादर की जमीनों मेें दर्जनों कालोनियों का निर्माण हो गया है। भूमाफियाओं और अधिकारियों की सांठ गांठ से वृंदावन, पानी गांव और राजपुर खादर में यमुना किनारे कई अवैध कालोनियां बस गईं। इससे यमुना खादर और बांगर धीरे धीरे सिमटते चले गए। मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण ने भी इन कालोनियाें के लिए सीवर, विद्युतीकरण, सड़क, पेयजल लाइन आदि की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दीं। इन अवैध निर्माणों के संबंध में पूर्व में मथुरा विकास प्राधिकरण ने कुछ क्षेत्रों को चिंहित कर पूर्व में फौरी तौर पर नोटिस थमाए लेकिन अवैध निर्माण आज भी बदस्तूर जारी हैं।
आरटीआई में उजागर हुआ मामला
समाजसेवी महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ला ने बताया कि 3 वर्ष पूर्व आरटीआई के तहत मांगी गईं जानकारी से उजागर हुआ था कि वृंदावन और आस पास के क्षेत्र में 21 अवैध कालोनियां बस गईं हैं। वहीं 2014 में पानी गांव के ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत के बाद तहसीलकर्मी पैमाइश में जुटे, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।
अवैध निर्माण के लिए अभियंता होंगे जिम्मेदार, सूची उपलब्ध कराएं
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता और सहायक अभियंताओं के उस वक्त पैरों तले जमीन खिसक गई, जब प्रभारी सचिव एडीएम ने अवैध निर्माण को लेकर खरी-खरी सुनाई। इस पर जब कुछ अभियंताओं ने ना-नुकुर की तो प्रभारी सचिव ने फोटो दिखाने की बात कहकर सभी की जुबान बंद कर दी।
विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष और सचिव का स्थानांतरण होने के बाद अब अवैध निर्माण की बाढ़ आ गई है। अवर अभियंता और सहायक अभियंताओं की मिलीभगत से जमकर निर्माण हो रहा है। पूर्व में जिन भवनों पर निर्माण रोक दिया था, उन्हें तेजी के साथ वर्तमान में पूरा किया जा रहा है। इसकी शिकायत प्रभारी उपाध्यक्ष डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी और प्रभारी सचिव एडीएम वित्त रवींद्र कुमार तक पहुंच रही हैं। इसी के दृष्टिगत बोर्ड बैठक के पहले शुक्रवार को एडीएम ने अभियंताओं की बैठक ली। साफ कह दिया कि जिस क्षेत्र में अवैध निर्माण मिला, उसके लिए जिम्मेदार संबंधित अवर अभियंता और सहायक अभियंता होंगे। उन्होंने कहा कि सभी अभियंता ऐसे निर्माण की सूची उपलब्ध करा दें। उनके पास अवैध रूप से चल रहे निर्माणों की फोटो सहित शिकायत आ रही हैं।