मथुरा। 250 करोड़ की लागत से नमामि गंगे योजना के तहत यमुना शुद्धिकरण की परियोजना से तैयार होने वाले टीटीआरओ प्लांट द्वारा हर दिन करीब दो करोड़ लीटर प्रदूषित जल को शुद्ध किया जा सकेगा। यह जल रिफाइनरी को दिया जाएगा। रिफाइनरी अभी तक मशीनरी की सफाई के लिए प्रयोग होने वाले इस जल को यमुना से ले रही है। जल निगम की देखरेख में परियोजना अक्तूबर 2020 तक पूरी हो जानी है।
यमुना में जाने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत मथुरा-वृंदावन के नालों से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए 460 करोड़ की योजना को स्वीकृत किया था। इसी योजना का एक भाग यह है कि मथुरा-वृंदावन के नालों को टीटीआरओ प्लांट तैयार कर एसटीपी मेें आने वाले प्रदूषित जल को लेकर शोधन करना।
इस के पश्चात यह जल रिफाइनरी को सप्लाई के रूप में दिया जाएगा। टीटीआरओ की फाउंडेशन तैयार कर ली गई है। टीटीआरओ द्वारा प्रतिदिन दो करोड़ लीटर प्रदूषित जल का शोधन किया जाएगा। पूरा प्रोजेक्ट अक्टूबर 2020 तक तैयार हो जाएगा। ड्रेनेज एवं सीवरेज इकाई जल निगम के सहायक अभियंता वसीम अतहर ने बताया कि अक्तूबर 2020 तक हम प्रोजेक्ट को तैयार कर लेंगे। इससे रिफाइनरी को प्रतिदिन दो करोड़ लीटर जल की सप्लाई होगी।
नालों का पानी जा रहा यमुना में
जब तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार नहीं हो रहा तब तक मथुरा-वृंदावन के नालों का पानी सीधे तौर पर यमुना में जा रहा है। जिससे यमुना कलुषित हो रही है। जानकारी रहे यमुना में नालों का पानी इतनी अधिक मात्रा मेें मिल रहा है कि यमुना में करीब 250 क्यूसेक गंगाजल मिलने के बाद भी यमुना जल आचमन योग्य नहीं हो पा रहा है।