मैनपुरी। जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है, लेकिन इस बार धान की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। तापमान अधिक होने के कारण धान की रोपाई रुकी हुई है। अगर इसमें अधिक देरी हुई तो पैदावार प्रभावित होगी। इससे जिले के हजारों किसानों को नुकान उठाना पड़ सकता है।
मैनपुरी में कुल कृषि योग्य भूमि 3.46 लाख हेक्टेयर है। इसमें से 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की जाती है। पूरे प्रदेश में मैनपुरी धान के उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार इस धान की फसल पर ही संकट के बादल छा गए हैं। जून का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अधिक तापमान में धान की रोपाई करना संभव नहीं है। अगर किसी किसान ने बुवाई कर भी अंकुरण नहीं होगा।
वहीं एक दूसरा संकट भी किसानों के सामने है। अगर जल्द ही नर्सरी की बुवाई नहीं की गई तो लेट बोई गई नर्सरी से पैदावार भी प्रभावित होगी। ऐसे में किसानों की मुश्किलें दिन भी दिन बढ़ती जा रही हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वे करें तो क्या करें।
दस जून तक होता है बुवाई का समय
धान की नर्सरी के लिए एक जून से लेकर दस जून का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। अगर इस दौरान नर्सरी की बुवाई हो जाती है तो हर हाल में जुलाई की शुरुआत में ही धान की नर्सरी की रोपाई शुरू हो जाती है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन भी मिलता है। लेकिन अब तक कहीं भी जिले में धान की बुवाई नहीं हुई है।
क्या कहते हैं जानकार
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि इस समय तापमान अधिक होने से धान की बुवाई का समय उपयुक्त नहीं है। अगर ऐसे में धान की बुवाई की गई तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसानों को कुछ दिन अभी और इंतजार करना चाहिए। आने वाले एक सप्ताह में तापमान कम होने की उम्मीद है। इसके बाद ही धान की बुवाई शुरू करनी चाहिए।
एक नजर में
- कुल कृषि क्षेत्र- 3.64 लाख हेक्टेयर
- धान का क्षेत्र- 1.46 लाख हेक्टेयर
- धान कृषक- 96 हजार
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किसानों की बात
मौसम के आगे किसी का बस भी नहीं चलता है। किसानों को भी इस बात की चिंता है कि मौसम कहीं धान की फसल को बर्बाद न कर दे।
अवधेश कुमार।
अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो धान की फसल देरी से होगी। इतना ही नहीं देरी से बोई गई फसल में सिंचाई भी अधिक करनी पड़ेगी।
अनूप सिंह।
मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। पहले जून के पहले सप्ताह से ही बारिश शुरू हो जाती थी। तभी धान की बुवाई होती थी, लेकिन इस बार बारिश नहीं हुई।
राकेश कुमार।
15 जून होने के बाद भी अब तक तापमान 40 के पार है। अगर ऐसे में धान की बुवाई की गई तो नमी और गर्मी से दाना मिट्टी में सढ़ जाएगा।
शैलेंद्र सिंह।