अफजलगढ़ क्षेत्र के ग्राम खुशहालपुर के जंगल में खड़ी मैंथा की फसल
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एटा। किसान अभी तक खेतों में सीधा पानी छोड़ रहे हैं, इसकी वजह से पानी का दोहन ज्यादा हो रहा है। पानी की बर्बादी और दोहन को रोकने के लिए ‘पर ड्राप मोर क्रॉप ’ योजना सरकार लेकर आई है। इस योजना के तहत रैन गन की व्यवस्थाएं किसानों को सुलभ कराई जाएंगी। योजना के माध्यम से 542 हेक्टेयर जमीन सिंचित करने का लक्ष्य दिया गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को कारगर बनाने की पहल शुरू हो गई है। किसानों को योजना के तहत ड्रिप सिंचाई पद्धति, पोर्टेबिल स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकलर और रेनगन स्प्रिंकलर के माध्यम से सिंचाई कराने पर सरकार जोर दे रही है। चालू वर्ष 2019-20 का लक्ष्य जिला उद्यान विभाग को दिया गया है, इसमें 542 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई कराने का लक्ष्य दिया गया है। रैनगन पद्धति से पानी की बर्बादी को पूरी तरह से रोका जा सकता है। इससे बौछारी सिंचाई होती है और पौधे के पत्तों को भिगोकर जड़ तक पानी जाती है। फसल को आवश्यकतानुसार पानी मुहैया कराया जाएगा अन्यथा पानी को बचाया जाएगा। पिछले वर्ष से योजना चालू की गई है और 100 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई कराने के लिए किसानों को योजना का लाभ भी दिया जा चुका है। इस योजना पर सरकार की ओर से किसानों को 90 फीसदी अनुदान दिया जाता है। जिला उद्यान अधिकारी नलिन सुंदरम भट्ट का कहना है कि किसानों के लिए बेहतर योजना है, रैनगन से सिंचाई करने पर फसल बेहतर होती है। किसानों को जागरूक करने की तैयारियां की जा रही हैं। किसानों को सलाह दी जाएगी कि सरकार 90 फीसदी अनुदान पर लाभ दे रही हैं इसका फायदा उठाएं।