ब्लड डोनेशन कैंप में ख्ाून दान करते युवक
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एटा। अभाव में जीने वाली ग्रामीण महिलाएं शहरी महिलाओं से बेहतर है। जी हां, आंगनबाड़ी केंद्र पर पंजीकृत गर्भवती महिलाओं की जांच से यह खुलासा हुआ। गांव की बजाय शहरी क्षेत्र के केंद्रों पर पंजीकृत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी ज्यादा पाई गई। यह महिलाएं एनीमिया की चपेट में हैं।
जिले में 1668 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां करीब पचास हजार गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। यहां स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसके साथ ही टीम इन महिलाओं में खून की जांच भी करती है। जहां आए आंकडे़ चौंकाने वाले है। यहां 38 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। इनमें सबसे अधिक खराब हालत शहरी क्षेत्र की महिलाओं की हैं। अर्बन क्षेत्र के की बात करें तो यहां 90 महिलाओं में खून की कमी पाई गई। अलीगंज विकास खंड में 250 से अधिक महिलाओं में खून की कमी है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों पंजीकृत गर्भवती महिलाओं के लिए हर माह पोषण आहार दिया जाता है।
आयरन की कमी से होती है परेशानी
आयरन के कारण ही शरीर के रक्त में स्थित रक्ताणओं में क्षमता और रक्त में लालिमा आती है। लौह तत्व की कमी से रक्त अल्पता अथवा रक्त में स्थिति कणों की कमी हो जाती है। शरीर में खून की कमी होने से थकावट जल्दी आती है। इसके साथ ही दुर्बलता व आल्यस भी आता है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है।