एटा। हवा दूषित हो गई है और पानी काला। धरती भी बंजर होने को है। साल दर साल बढ़ता प्रदूषण का ग्राफ लोगों की सेहत के लिए खतरा बनता जा रहा है, लेकिन इसे रोकने के उपाय पूरी तरह से फेल हैं। हर बार विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदूषण को कम करने के लिए तमाम दावे और बातें की जाती हैं, लेकिन एक दिन बाद सब कुछ भुला दिया जाता है। आलम यह हुआ है कि जिले में पीएम 10 की मात्रा 150 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गई है। जोकि जिले के लोगों के लिए बढ़ा खतरा है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण को सजग होने की जरूरत है।
ये हैं प्रमुख कारण
वायु प्रदूषण का बड़ा कारण जिले मेें वाहनों का बढ़ता बोझ, धुआं उगलते वाहन, शहर के किनारे जलने कूड़े का धुआं और कटते पेड़ हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में हर साल 50 हजार वाहन नए आते हैं, जबकि पुराने वाहनों को हटाने की कोई योजना नहीं बनी है। आलम यह है कि एनसीआर से हटाए गए वाहन जिले में दौड़ रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण बढना स्वाभाविक है।
120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए मात्रा
नियमों के मुताबिक वातावरण में सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए, लेकिन जिले में यह बढ़ चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष वातावरण पीएम की मात्रा 93 थी, जो कि इन दिनों 145-150 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच चुकी है।
ये हैं वाहनों की स्थिति
स्कूटर- 7554
मोपेड- 3800
बाइक- 220000
कार- 8000
बस- 500
ट्रैक्टर- 21159
ट्रक- 2256
कहते हैं आकंड़े
ध्वनि प्रदूषण
वर्ष प्रदूषण की इकाई
2017 80 से 92 डेसिबल
2018 85 से 95 डेसिबल
2019 87 से 96 डेसिबल
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
वर्ष पीएम एसओ एनओ
2017 93 38 44
2018 94 40 49
2019 100 42 52
इन बीमारियों के बढ़ रहे रोगी
जिले में प्रदूषण बढ़ने के बाद सांस, अस्थमा, हार्ट अटैक, हाइपरटेंशन दमा समेत तमाम बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं। फिजीशियन डा. एस चंद्रा बताते हैं कि लोगों को घर से बाहर निकलते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि चेहरा ढका हो। प्रदूषण बढ़ने से बीमरियां बढ़ रही हैं।
प्रदूषण का बढ़ता कहर हानिकारक है। इसके दुष्प्रभाव भविष्य में घातक होंगे। अभी से प्रदूषण रोकने की पहल की जाए।
डा. ज्ञानेंद्र रावत, पर्यावरणविद्
बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक है। सांस लेने में तकलीफ होने जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रदूषण रोकने के लिए हर व्यक्ति को खुद से पहल करनी होगी।
डा. निरुपमा वर्मा, समाज सेविका