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लू के थपेड़ों ने किया बेहाल, पारा 44 पार

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लू के थपेड़ों ने किया बेहाल, पारा 44 पार - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। बुधवार को भी मौसम के तेवर काफी तल्ख रहे। पारा एक डिग्री चढ़कर 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। गर्मी के चलते बाजारों, सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। घरों में लगे पंखे, कूलर भी लोगों को गरमी से राहत नहीं दिला पाए।
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बुधवार को गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। सुबह से ही काफी गरमी पड़ने लगी। सुबह 8 बजे ही पारा 36 डिग्री तक पहुंच गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया गर्मी के तेवर तल्ख होते चले गए। 10 बजे पारा 40 डिग्री को पार कर गया। मौसम के तल्ख तेवरों को देख लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं दिखा सके। जिन लोगों को आवश्यक कार्य से बाहर जाना भी था तो वे पूरी तरह से बचाव के साधन लेकर निकले। दोपहर के समय पारा 45 डिग्री तक जा पहुंचा। गरम हवा के थपेड़ों ने लोगों को परेशान कर दिया। बाजारों में सन्नाटा छा गया। सांय छह बजे के बाद जब पारा कुछ नीचे आना शुरू हुआ तो लोगों ने फिर से बाजार की ओर रुख किया।
शीतल पदार्थों का बढ़ गया सेवन
कासगंज। गर्मी के तल्ख तेवरों के चलते शीतल पेय पदार्थ का सेवन लोगों ने बढ़ा दिया है। लोगों ने सत्तू, दही की लस्सी, खीरा, ककडी, तरबूज, आम का पना, नीबू की शिकंजी, शर्बत आदि गर्मी से राहत देने वाली देशी चीजों का सेवन लोगों ने बढ़ा दिया है।
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मौसम एप दे रहा गर्मी बढने के संकेत
दिन अनुमानित रहने वाला पारा डिग्री सेल्सियस
गुरुवार 46
शुक्रवार 46
शनिवार 47
रविवार 48
फोटो सहित
एटा। भीषण गर्मी परेशानियां बढ़ाती जा रही है, लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। पारा 44 पार पहुंचा तो लू के थपेड़ों ने आम आदमी का निकलना दुश्वार कर दिया। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग शीतल पेय का सहारा ले रहे हैं लेकिन गर्मी के तेवर के आगे सब फेल होते साबित हो रहे हैं।
बुधवार को तापमान 44 के पार चला गया। इससे लू के थपेड़ों ने आमजन की हालत खराब कर दी। लोग लू से बचने के लिए गमछा आदि का सहारा लेते गए। वहीं महिलाएं और युवतियों को स्टॉल बांधकर चेहरे को ढकने पर मजबूर कर दिया। भीषण गर्मी में घर, दफ्तर आदि से बाहर निकलते ही सूरज से आग बरसती नजर आई। हर कोई तापमान में बढ़ी तपिश को लेकर जून में अत्यधिक गर्मी पड़ने की आशंकाओं से घिरे देखे गए। यही वजह रही है बाजारों में रौनक भी नहीं दिखी और सड़कों व गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। ऐसे में पशु और पक्षियों की स्थिति भी खराब रही, निराश्रित पशु पानी को तरसते देखे गए तो पक्षियों ने पानी के सहारे अपना ठिकाना ढूंढा।
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