मैनपुरी। मैनपुरी कच्ची शराब के निर्माण में अव्वल रहा है। काली नदी किनारे शराब की भट्ठियां दिन रात धधकती थीं। कई लोगों की मौत की वजह यहां की कच्ची शराब बनी। एटा में 39 लोगों की मौत मैनपुरी में बनी कच्ची शराब पीने से ही हुई थी। लोकसभा चुनाव के समय प्रशासन की सख्ती से कच्ची शराब का धंधा जिले में दम तोड़ चुका है।
बराबंकी में शराब ने एक ही झटके में कई परिवार की खुशियों को छीन लिया। जिले में भी कई बार लोग कच्ची शराब पीने से जान गवां चुके हैं। मैनपुरी जिले में खुलेआम कच्ची शराब का निर्माण होता है। सबसे ज्यादा कच्ची शराब काली नदी किनारे बनाई जाती है। वर्ष 2016 में थाना कुरावली क्षेत्र के गांव गोकुलपुर में बनाई गई कच्ची शराब पीने से एटा में 39 लोगों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद भी जिले की शराब से कई हादसे होते रहे हैं।
कुरावली क्षेत्र अवैध कच्ची शराब का गढ़ कहा जाता है। इसके अलावा बिछवां क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर कच्ची शराब उतारी जाती है। कुरावली क्षेत्र में गांव बुर्रा, सहारा, सिमरई, नगला बलू, बिछवां, कुबेरपुर, करीमगंज, मरहरी, गनेशपुर, देवगंज, मधुपुरी, किन्हावर, भवीचंदपुर समेत कई स्थानों पर शराब का धंधा होता है। शहर क्षेत्र के गांव इटौरा, पुसैना, धारऊ और गिहार कालोनियों में अवैध कच्ची शराब का धंधा कई वर्षों से फल फूल रहा है।