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भीषण गर्मी में गहराता जा रहा पेयजल संकट, दूषित पानी पीने को मजबूर लोग 

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गर्मी में प्यास बुझाता युवक - फोटो : अमर उजाला
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पेयजल संकट से जूझते एटा शहर को पालिका महज 94 लाख लीटर पानी ही मुहैया करा पा रही है। जबकि शहर को एक करोड़ लीटर पानी की जरूरत है। इसके साथ ही शहर की पेयजल व्यवस्था केवल 11 नलकूपों और सात ओवरहैड टैंकों पर टिकी है। ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
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नगर पालिका की पेयजल परियोजनाएं संसाधनों के अभाव में बदहाल हो रही हैं। शहर में लगे 30 नलकूपों में से 11 ही काम कर रहे हैं। जबकि 10 नलकूप पाइपलाइनों की मरम्मत के चलते खराब पड़े हैं और शेष नलकूप पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं।

 

आलम यह है कि शहर में पालिका द्वारा प्रतिदिन दो बार पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन पाइपलाइनों में खराबी के चलते लोगों को दूषित पेयजल इस्तेमाल करना पड़ता है। वर्ष 2011 में जलनिगम ने शहर में नई पाइपलाइन बिछाई थी, लेकिन पाइपलाइन को पूरी तरह से नलकूपों से इंटर कनेक्ट नहीं किया जा सका।

सबसे ज्यादा खराब हालात मारहरा दरवाजा और किदवई नगर क्षेत्र में है। यहां लोगों को पूरे प्रेशर से पानी नहीं मिलता। अगर आ भी जाए तो पानी ऊपर की मंजिलों में नहीं पहुंच पाता। ऐसे में शहर में विभिन्न स्थानों पर पानी भरने को कतारें नजर आती है।

 

पालिका के जलकल प्रभारी सोवरन सिंह यादव कहते हैं कि 11 नलकूपों और सात ओवर हैड टैंक के जरिए शहर में पानी की सप्लाई की जा रही है। ताकि लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा सके। खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत का काम चल रहा है। वे बताते हैं कि पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं। इसके चलते प्रेशर से घरों में पानी नहीं पहुंच पाता। पालिका 70 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से पानी की आपूर्ति कर रही है।

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गर्मी में बढ़ जाती है जरूरत
गर्मी आते ही शहर में पानी की जरूरत बढ़ जाती है। सर्दियों में प्रतिव्यक्ति पानी की जरूरत 115 लीटर होती है, जोकि गर्मियों मेें बढ़कर 125-130 लीटर हो जाती है। जलकल प्रभारी ने बताया कि गर्मियों में पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कवायद की जा रही है।

ओवर हैड टैंकों की सफाई की कवायद शुरू
शहर में बने 10 ओवर हैड टैंकों में से सात चालू हालत में हैं। इनमें महज एक ओवर हैड टैंक की सफाई हो चुकी है। बताया जाता है कि एक ओवर हैड टैंक की सफाई में 65 लीटर क्लोरीन का प्रयोग होता है। इसके साथ ही तीन से चार हजार रुपये का खर्च आता है। वैसे तो हर पांच से छह महीने में सफाई का प्रावधान है, लेकिन शहर में एक साल में सफाई हो पाती है। मौजूदा समय में पालिका के पास 200 लीटर क्लोरीन का स्टॉक है।

हैंडपंपों का हाल भी खराब
शहर में लगे 1590 हैंडपंपों में से 1200 चालू हालत मेें हैं। इसके अलावा 125 हैंडपंप रिबोर योग्य हैं और शेष खराब हैं। पालिका के अधिकारियों की मानें तो हैंडपंपों को दुरुस्त करने के लिए टीम लगाई गई है। जो रोज तीन से चार हैंडपंप सही कर रही है।
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कहते हैं आंकड़े
शहर में कुल नलकूप- 30
चालू हालत में नलकूप- 11
मरम्मत हो रहे नलकूप- 20
शहर में कुल हैंडपंप- 1590
चालू हालत में हैंडपंप- 1200
शहर में ओवरहैड टैंक- 10
कुल चालू ओवरहैड टैंक- सातह्य

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