मथुरा। गुरुवार की शाम को आई आंधी ने बिजली व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया। आंधी से सैकड़ों बिजली के पोल टूट गए। बिजली की लाइन उखड़ गईं थीं। तीन दिन बाद भी बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी है। अभी भी 200 गांवों में बिजली नहीं है। अधिकारियों का दावा है कि कुछ जगह पोल बदल लिए गए हैं जबकि बाकी जगह जल्द ही सुधार कर लिया जाएगा।
आंधी के साथ हुई बारिश से 300 से भी अधिक बिजली के पोल टूट गए थे। तारों पर पेड़ गिर जाने से बिजली लाइन ध्वस्त हो गईं थीं। बिजली विभाग को भारी नुकसान माना जा रहा है। हालांकि सुधार का काम भी तेजी के साथ चल रहा है लेकिन अभी भी जिले के 200 गांवों में बिजली नहीं आई है।
राया, मांट और बलदेव क्षेत्र के गांवों में तीन दिन से बिजली नहीं है। मांट बिजलीघर से पोषित जाबरा, नगला बरी, जैसवां, खर्रम, मथा, नगला वैंसला, केहरिया, वकला सहित 40 गांव एवं नंद की नगरिया के दरबै, आशागड़ी, अरुआ, चौकड़ा, कसेरा आदि 20 गांवों और मजरों में 230 से अधिक पोलों के साथ तार टूटे पड़े हैं। इससे 60 गांव दो दिन से भी अधिक समय से अंधकार में डूबे हैं। एसडीओ मांट ने बताया कि 230 पोल टूटे पड़े हैं।
राया के लगभग 35 गांव और मजरों की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पोल टूटने से गोकुल, राया के साथ नीमगांव, खड़वा, बड़ौन आदि गांवों के लोग पिछले तीन दिनों से अंधकार में रात गुजारने को मजबूर हैं। बलदेव के इब्राहिमपुर, नगला सेवा, नगला कल्लू और विरोना सहित कई गांवों में 24 से अधिक विद्युत पोल टूटे पड़े हैं। अधिकारी जल्द बिजली बहाल किए जाने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन विद्युत व्यवस्था सुचारू नहीं हो पा रही है। गांव गांव पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं। पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। हैंडपंप का सहारा लिया गया है। इधर गांव सलेमपुर में भी 20 से अधिक पोल टूटे पड़े हैं।
नुकसान बहुत हुआ है। हर जगह टीमों को लगा दिया गया है। काफी हद तक कवर भी किया जा चुका है। रविवार की शाम तक स्थिति में सुधार नजर आएगा। टूटे पोल के स्थान पर नए पोल लगाने का काम किया जा रहा है।
-अजय गर्ग, अधीक्षण अभियंता